
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पर्वतीय क्षेत्रों में आपराधिक मामलों की जांच का कार्य राजस्व पुलिस से कराने के मामले में प्रमुख सचिव उत्तराखंड और प्रिंसिपल सेक्रेटरी गृह को शपथपत्र दाखिल करने के निर्देश दिए हैं कि पर्वतीय क्षेत्र के लोगों को उचित एवं वैज्ञानिक जांच से क्यों वंचित किया गया है।
न्यायमूर्ति आलोक सिंह की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। हरिद्वार निवासी श्रीमती शकुंतला रौतेला ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि उसके पति की हत्या कर दी गई थी जिसकी रिपोर्ट उसने 19 जनवरी 2013 को लिखाई थी। मामले की जांच राजस्व पुलिस ने की जो त्रुटिपूर्ण थी। मुख्य अभियुक्त को जानबूझकर अभियुक्त नहीं बनाया गया और जांच नियमानुसार नहीं की गई। याचिका में कहा गया कि राजस्व पुलिस तकनीकी रूप से जांच करने के लिए सक्षम नहीं होती है और जबकि शहरी क्षेत्रों में छोटे-छोटे अपराधों की भी जांच तक सिविल पुलिस करती है। याचिका में यह भी कहा गया कि पर्वतीय क्षेत्र में राजस्व पुलिस द्वारा और शहरी क्षेत्र में सिविल पुलिस द्वारा जांच करना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है। पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने राज्य सरकार को दस दिन के भीतर इस आशय का शपथपत्र दाखिल करने के निर्देश दिए है कि पर्वतीय क्षेत्र के लोगों को उचित एवं वैज्ञानिक जांच से क्यों वंचित किया गया है।
