शिक्षा और सर्वधर्म के लिए जिए प्रताप भैय्या

नैनीताल। तीन वर्ष पहले नैनीताल ने उन दो अनमोल हस्तियों को खोया था, जिन्होंने अपने सिद्धांतों के बल पर जीवन में मुकाम बनाया। पहले जनकवि गिरीश तिवारी गिर्दा और दूसरे प्रताप भैय्या। श्री भैय्या ने शिक्षा के क्षेत्र में अलख जगाई और समाज के समक्ष सर्वधर्म संभाव की नजीर पेश की।
उत्तर प्रदेश लोक रत्न, उत्तरांचल रत्न, लाइफ टाइम एचीवमेंट अवार्ड समेत विभिन्न पुरस्कारों से नवाजे गए इस सच्चे समाजवादी ने 1962 में भारत चीन-युद्ध के बाद शहीद सैनिक परिवारों के बच्चों के लिए स्कूल खोलने का संकल्प लिया। प्रताप भैय्या ने एक जुलाई 1964 में भारतीय शहीद सैनिक स्कूल की स्थापना की थी। तब से उन्होंने यूपी और उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों में 125 से ज्यादा स्कूल स्थापित किए। उन्होंने स्याल्दे तथा मानिला में उच्च शिक्षा संपर्क केंद्र खोले जो बाद में डिग्री कालेज बने।
1967-68 में स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए प्रताप भैय्या ने नैनीताल में नर्सेज ट्रेनिंग के साथ ही ओखलकांडा, हल्द्वानी में अस्पताल श्री भैय्या ने बनवाए। समाज में एकता और बराबरी स्थापित करने के लिए प्रताप भैय्या ने जाति प्रथा की खिलाफत की औैर अपने नाम के आगे जाति (सरनेम) के बजाए भैय्या शब्द जोड़ा। वह चौधरी चरण सिंह, एनडी तिवारी, चंद्रशेखर, वीवी गिरी, जैल सिंह तथा नेपाल के प्रधानमंत्री लोकेंद्र बहादुर के काफी करीबी रहे। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर नैनीताल में उनके आवास पर लंबे अर्से तक रहे। 30 दिसंबर 1932 को नैनीताल जिले के च्यूरीगाढ़ में जन्मे श्री भैप्या ने 23 अगस्त 2010 को अंतिम सांस ली।

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