
नई दिल्लीः मौजूदा समय में यूपीए सरकार की बेचैनी लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है। अगर आप सोच रहे है कि यहां पर हम मोदी के बारे में बात कर रहे है तो आप गलत है क्यूंकि यहां हम बात कर रहे है यूपीए सरकार के खाद्य सुरक्षा बिल के बारे में जो कि अधर में लटकता दिखाई दे रहा है। यूपीए के लिए संसद में इस बिल को पास करवाना टेढी खीर साबित हो रहा है।
मंगलवार को कांग्रेस इस बिल को पास करवाने के लिए पूरे दम-खम के साथ संसद में उतरी थी लेकिन कोयला घोटाले की फाइलें गायब होने के मुद्दे पर प्रधानमंत्री के बयान की मांग करते हुए दोनों सदनों में जमकर हांगामा हुआ और कांग्रेस के बिल वाले मुद्दे पर चर्चा न हो सकी।
इसके बाद यूपीए की तरफ दावे हो रहे थे कि गुरुवार को इस बिल को पास करवा दिया जाएगा लेकिन उनकी ये कोशिश भी रंग नहीं लाई और इसके पीछे का कारण अकस्मात से कांग्रेस के संसदीय कार्यमंत्री कमलनाथ बन बैठे। जी हां 11 सांसदों को निलंबित करने के कमलनाथ के प्रस्ताव पर भारी हंगामे की बीच लोकसभा की कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित कर दी गई।
गुरुवार को संसदीय कार्यमंत्री ने लोकसभा में इस सत्र में हंगामा करने वाले टीडीपी के चार और कांग्रेस के सात सांसदों को मौजूदा सत्र की कार्यवाही से निलंबित करने का प्रस्ताव रखा, लेकिन यह दांव भी फिलहाल उल्टा पड़ता दिख रहा है। बीजेपी इन सांसदों के बचाव में आ गई और प्रस्ताव पारित नहीं हो सका।
इस समय कांग्रेस की जो सबसे बड़ी दुविधा है वो ये कि उनकी विपक्षी बीजेपी के साथ-साथ उनको लंगाना के प्रस्ताव का विरोध कर रहे सीमांध्र के अपने सांसदों और टीडीपी से भी निपटना पड़ रहा है जो कि उनके गले की फांस बन चुका है। बीजेपी की लगातार मांग के चलते कांग्रेस ने ये संकेत दिया है कि प्रधानमंत्री कोयला घोटाले को लेकर सदन में जल्द ही बयान दे सकते हैं। गौर हो कि बीजेपी द्वारा लगातार इसके लिए मांग उठाई जा रही है। उधर सरकार द्वारा मॉनसून सत्र की अवधि को 5 सितंबर तक बढ़ा दिया है और कांग्रेस ये पुरजोर कोशिश करेगी कि इस अवधि में बिल को पास करवा लिया जाए। (नीरज बाली)
