रजेरा के एक दर्जन गांवों को नहीं मिली सड़क

रजेरा (चंबा)। क्षेत्र की रजेरा पंचायत और बैली के ऊपरी छोर में बसे एक दर्जन गांवों को सड़क रूपी भाग्य रेखा नसीब नहीं हो पाई है। आजादी के छह दशक बाद भी ग्रामीणों को रोजमर्रा की वस्तुएं पीठ पर घर लानी पड़ती हैं। पंचायत के संगेड़, कपाडू, बरूणा, ककला, थल्ला, वैली, बाड़का, कुट, बन्नी, कुकनार, मंदा, गलू गांवों की सैकड़ों की आबादी को रोजाना पैदल तीन-चार किलोमीटर सफर करना पड़ता है। करीब एक दशक पहले ग्रामीणों की मांग को देखते हुए इन गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ने का निर्णय लिया था। पूर्व पशु पालन मंत्री हर्ष महाजन के कार्यकाल में प्रदेश सरकार ने सड़क के लिए धनराशि स्वीकृत की थी और कार्य काफी तेजी से शुरू हुआ। इसके बाद संगेड़-वैली सड़क का निर्माण कार्य दो किलोमीटर पूरा होने के बाद आगे का कार्य अधर में लटक गया है। भाजपा के कार्यकाल में इस मार्ग पर कोई कार्य नहीं हो पाया। विभाग भी सड़क निर्माण कार्य को पूरा करने में कोई रुचि नहीं दिखा रहा है। रजेरा के प्रधान नरेश कुमार और उपप्रधान टेक चंद, रजेरा पंचायत के पूर्व प्रधान राजेंद्र सिंह, वार्ड पंच कंचन देवी, सुंदर सिंह, हर्ष कुमार, अनी राम, भोज सिंह, भिंद्र सिंह, राजेंद्र सिंह, ओम प्रकाश, हंस, तिलक राज, देस राज, रत्तन चंद, बजर सिंह, कश्मीर और मनोज ने बताया कि वे सड़क निर्माण करने की मांग कई मर्तबा कर चुके हैं। गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि बीमार लोगों को अस्पताल तक लाने के लिए चारपाई का सहारा लेना पड़ता है। क्षेत्र के नौनिहालों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए रोजाना पैदल सफर करना पड़ता है। ग्रामीणों ने प्रदेश सरकार और वनमंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी से मांग की है कि गांवों को सड़क सुविधा से जल्द जोड़ा जाए।
उधर, लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता एमके मिन्हास ने बताया कि फोरेस्ट क्लीयरेंस न मिलने के कारण सड़क का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। फोरेस्ट क्लीयरेंस के लिए केस शिमला भेजा गया है।

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