टूटे-फूटे रास्तों पर सिसक रही जिंदगी

कोटली (मंडी)। जिले में भारी बारिश से टूटे-फूटे रास्तों पर जिंदगी सिसक रही है। बारिश ने न रास्ते छोड़े और न मकान। पिछले दिनों हुई बारिश से क्षतिग्रस्त बागी-पराशर और मंडी-जंजैहली मार्ग से कई गांवों का संपर्क कट गया है। लोगों को कई किलोमीटर पैदल चल कर पीठ पर राशन और नकदी फसल ढोनी पड़ रही है। बागी-पराशर मार्ग पर कई वाहन फंसे हुए हैं।
उत्तरशाल क्षेत्र के सेगली पंचायत के अंतर्गत बागी गांव में गत शनिवार को भारी बारिश ने तबाही मचाई। बागी-पराशर मार्ग क्षतिग्रस्त होने से बड़वार, चुली रांग, सुहड़ा, बनौण, सकरयार, छियागला, कांढलू, हलगढ़, मुसाई, सरखणी, टिल, पराशर, बागी, मंडाह, काहणू, सलेहड़, कालंग, कलवाड़, नहनी, धारा बागल, सूरन, सोलंग, रेहड़ू, बम्बोला, बाहड़ा आदि गांवों का संपर्क कट गया है। ग्रामीण नकदी फसल फ्रांसबीन, गोभी, बंदगोभी, मूली, बैंगन, सेब के अलावा दूध, पनीर, खोया कई किलोमीटर पैदल चल कर बाजार तक पहुंचा रहे हैं। स्थानीय निवासी हरी सिंह, वीरबल, डोले राम, नरेश कुमार, रूप लाल, महेश कुमार, दौलत राम, महेंद्र कुमार, नेत्र सिंह, टेक चंद, जगदीश, जय देव, तुलसी राम, खीमे राम, बबलू, वीरभद्र, नरोत्तम राम आदि ने कहा कि मार्ग बंद होने से करीब 7-8 किलोमीटर पैदल चलकर नकदी फसलों को पीठ पर लाद कर सड़क तक पहुंचाना पड़ रहा है। लोक निर्माण विभाग के एसडीओ प्रदीप कुमार ठाकुर ने बताया कि जल्द ही खड्ड के पास बही सड़क को जीप योग्य बनाया जाएगा। उधर, मंडी-जंजैहली मार्ग भी युनाग के पास ओडीधार में डंगा गिरने से अवरुद्ध है। पूरे मार्ग पर जगह-जगह भूस्खलन के कारण मार्ग बंद हो रहा है। जिससे क्षेत्र के किसानों को सेब और आलू की फसल मंडियों तक पहुंचाने में खासी परेशानी झेलनी पड़ रही है।

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