
बिलासपुर। जिला स्तर पर कर्मचारियों के विभिन्न गुटाें द्वारा आपसी मतभेदों को दरकिनार करके बनाई गई तदर्थ समिति क्या अपने उद्देश्य से भटक गई है, या उनमें दूरियां दोबारा पैदा होने लगी हैं? सोमवार को अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के एक गुट के पदाधिकारी के स्वागत समारोह ने इन अटकलों को हवा दी है।
बिलासपुर जिले के कर्मचारी नेताओं ने इस बार आपसी मतभेदों को दरकिनार करते हुए एकजुटता का नारा बुलंद किया है। संयुक्त रूप से गठित तदर्थ समिति के बैनर तले अराजपत्रित कर्मचारी संघ के चुनाव कराए जा रहे हैं। खंड स्तरीय चुनाव की प्रक्रिया 20 अगस्त को संपन्न होने जा रही है, जबकि जिला इकाई के चुनाव के लिए 23 अगस्त का दिन निर्धारित किया गया है। तदर्थ समिति ने यह निर्णय भी लिया है कि प्रदेश स्तर पर सरकार से मान्यता हासिल करने वाले महासंघ के साथ आगे बढ़ा जाएगा। अभी तक प्रदेश में दो गुट अपने-अपने स्तर पर कार्यकारिणी बना चुके हैं। मान्यता किसे मिलेगी, यह फिलहाल भविष्य के गर्भ में छिपा हुआ है।
सोमवार को मनकोटिया गुट की प्रदेश कार्यकारिणी में शामिल किए गए प्रदीप चौहान का बिलासपुर में गर्मजोशी से स्वागत किया गया। स्वागत करने वालों में तदर्थ समिति के नुमाइंदे भी शामिल थे। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या बिलासपुर की ओर से मनकोटिया गुट को हरी झंडी दे दी गई है? उधर, तदर्थ समिति के दो मुख्य सदस्यों लेखराम कौंडल व इंद्र ठाकुर ने कहा कि जिले में निष्पक्ष ढंग से चुनाव कराए जा रहे हैं। ऐसे में जिला की ओर से प्रदेश स्तर पर किसी गुट में शामिल होने अथवा किसी गुट के पदाधिकारी के स्वागत का सवाल ही पैदा नहीं होता। तदर्थ समिति के अध्यक्ष चेतराम वर्मा ने कहा कि शिक्षा विभाग में कार्यरत प्रदीप चौहान का स्वागत कार्यक्रम इस महकमे के कर्मचारियों द्वारा ही रखा गया था। उन्हें व्यक्तिगत तौर पर इसमें बुलाया गया था। जिले के कर्मचारियों ने किसी भी गुट के चुनाव में भाग नहीं लिया है। 23 अगस्त को जिला इकाई के चुनाव के बाद ही सर्वसम्मति से इस बारे फैसला लिया जाएगा।
