
थराली। जौला-बुडजौला के ग्रामीणों ने विस्थापन और आपदा प्रभावित क्षेत्र घोषित किए जाने की मांग को लेकर तहसील में प्रदर्शन किया। साथ ही समस्या हल नहीं होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी।
ग्रामीणों का कहना है कि जौला गांव पिछले कई साल से भूस्खलन से प्रभावित है, लेकिन वर्ष 2010 में विस्थापन सूची में शामिल करने के बाद भी इसकी समस्या हल नहीं हो पाई है। कहा कि गांव के नीचे से लगातार भूस्खलन हो रहा है। कई ग्रामीणों के मकानों में दरारें आ चुकी है। गांव से दो किमी दूर नैलखाल में बनी झील से भी गांव के लिए खतरा बना हुआ है। वहीं पांच किमी दूर सड़क से जोड़ने वाला चेपडियूं पुल के भी आपदा में बहने से ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई है, लेकिन अभी तक राजस्व पुलिस और प्रशासन द्वारा गांव का निरीक्षण कर आपदा प्रभावित घोषित नहीं किया गया है। गांव में आपदा राहत सामग्री के नाम पर ग्रामीणों को कुछ भी नहीं मिला है। उन्होंने जल्द गांव को विस्थापित और आपदा प्रभावित घोषित नहीं किए जाने की स्थिति में उग्र आंदोलन की चेतावनी दी। प्रदर्शनकारियों में दयाल राम, गजपाल सिंह, राजेंद्र सिंह, आलम सिंह, प्रधान कमला देवी, महादेवी, माना देवी, गजेंद्र सिंह, चंद्री राम आदि शामिल थे। वहीं इस दौरान तहसील में आपदा आयुक्त वी. षणमुगम और एसडीएम विवेक कुमार ने ग्रामीणों से वार्ता की। उन्होंने बताया कि 16 जून को आई आपदा से जो गांव प्रभावित हुए थे, उन्हीं को सूची में शामिल किया गया है। लेकिन अब पुन: नई सूची तैयार की जा रही है, जिसमें कई अन्य प्रभावित गांवों को भी शामिल किया गया है। कहा कि नैलखाल में बनी झील की स्थिति को जानने के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई है, जो जल्द रिपोर्ट आ जाएगी।
