चारों और आपदा से घिरा सेम गांव

उत्तरकाशी। भूस्खलन तथा जलकुर नदी में हो रहे कटाव से सेम गांव पनर खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीण हल्की सी बारिश में गांव को छोड़ कर सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए मजबूर हैं।
ग्राम पंचायत ठांडी के लगभग 120 परिवारों वाले सेम गांव के ग्रामीण बरसों से प्रकृति का कहर झेल रहे हैं। जून में तीन दिनों तक हुई मूसलाधार बारिश से गांव का अस्तित्व अब पूरी तरह से खतरे में आ गया है। गांव के ऊपर की पहाड़ी से भूस्खलन हो रहा है और नीचे उफनती जलकुर नदी कटाव कर रही है।गांव के दोनों और बह रहे गदेरों से भी कटाव हो रहा है। चारों और से संकट के बादल मंडराने से ग्रामीण दशहत में हैं।रामचंद्र चमोली बताते हैं कि गांव में हाल ही बना एक घर भूस्खलन की भेंट चढ़ गया। सामाजिक कार्यकर्ता द्वारिका सेमवाल और पूर्व प्रधान बुद्धि सिंह पंवार ने बताया कि ग्रामीण 1993 से पुनर्वास की मांग कर रहे है। प्रशासन ने सर्वेक्षण भी करवाया था लेकिन कोई कदम नहीं उठाया।
भूस्खलन की जद में आए तहसील के सभी गांवों का भू-वैज्ञानिकों से सर्वे करवाया जा रहा है। ठांडी ग्राम पंचायत के सेम गांव में भी भूस्खलन की सूचना पर क्षेत्रीय पटवारी को मौके पर भेज दिया गया है। प्रभावित ग्रामीणाें को नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा। सेल गांव का वर्ष 2010 में सर्वे करवाकर रिपोर्ट शासन को भेज दी थी।
एसके.बरनवाल, एसडीएम डुंडा।

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