हाईवे खोलना तो दूर पगडंडी भी नहीं बन पा रही

उत्तरकाशी। बारिश और भागीरथी के उफान ने गंगोत्री हाईवे इस कदर ध्वस्त हो गया कि इस पर लंबे समय तक तीर्थयात्रा तथा सीमाओं की ओर सुरक्षित आवाजाही में मुश्किल खड़ी हो गई हैं। चिन्यालीसौड़ से लेकर डबराणी, सुक्की तक एक दर्जन ऐसे बड़े भूस्खलन क्षेत्र विकसित हो गए हैं कि यहां सड़क तो क्या सीमा सड़क संगठन दो माह में पगडंडी भी तैयार नहीं कर पाया है। अक्टूबर में हाईवे शुरू करने के दावे तो अभी दूर की कौड़ी लग रहे हैं।
जिला मुख्यालय तक गंगोत्री हाईवे की दशा चिन्यालीसौड़, बड़ेथी, धरासू, धरासू बैंड, नालूपाणी, सिंगोटी, नाकुरी, बंदरकोट तथा चुंगी बड़ेथी में भागीरथी के कटाव से बदहाल है। यहां कुछ समय से भारी वाहनों की आवाजाही बंद पड़ी है। उत्तरकाशी से आगे गंगोरी, नेताला, हीना, भाटुकासौड़, विशनपुर, लाल ढांग, सैंज, लाटा, मल्ला, भटवाड़ी, चड़ेथी, हेलगूगाड, सुनगर, गंगनानी, डीएम स्लाइड के पास भी भागीरथी ने हाईवे को तहस नहस कर दिया है। 16-17 जून ही नहीं इसके बाद भी भागीरथी तथा सहायक नदियों के मलबे से भागीरथी के बहाव की दिशा बदलते रहने से कटाव से जमीन खिसकने का सिलसिला बदस्तूर जारी है।
नेताला, लालढांग, मल्ला, चड़ेथी, गंगनानी तथा डीएम स्लाइड के पास तो भागीरथी के कटाव से हाईवे के काफी ऊपर से पहाड़ी दरक कर नीचे आ रही है। यहां राहगीर पैदल चलने में भी कतराने लगे हैं। यहां बीआरओ की पगडंडी तैयार करने की कोशिश पर आए दिन होने वाली बारिश पानी फेर देती है। बीआरओ अभी भैरोंघाटी से चीन सीमा की ओर कई किमी ध्वस्त हाईवे को खोलने की शुरूआत भी नहीं कर पा रहा
प्रतिकूल मौसम के कारण गंगोत्री हाईवे वाहनों की आवाजाही लायक तो दूर यहां पैदल आने जाने के लिए पगडंडी तक नहीं बन पा रही है। अभी हाईवे के कुछ नए हिस्से तथा बाईपास निर्माण की योजना बनाना तो दूर इस बारे में अभी कुछ सोचना भी मुश्किल है।

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