
सोमेश्वर। तहसील क्षेत्र के अंतर्गत बारिश से क्षतिग्रस्त दो दर्जन सिंचाई नहरें लंबे समय बाद भी दुरुस्त नहीं हो पाई हैं। इस कारण घाटी क्षेत्र में लगाई गई धान की फसल को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। खेती बारिश पर ही निर्भर हैं। नहरें ठीक नहीं होने से काश्तकारों में रोष है। उन्होंने सिंचाई विभाग से जल्द नहरें दुरुस्त करने की मांग की है।
घाटी क्षेत्र के अधिकांश काश्तकार खेती पर ही निर्भर हैं। क्षेत्र के तीन सौ हेक्टेयर इलाके में सिंचाई के लिए 25 नहरें बनी हैं। कोसी और साई नदी से इन नहरों में पानी की आपूर्ति होती है। जून के मध्य क्षेत्र में हुई तेज बारिश से कोसी और साई नदी के उफान में आने से सिरखेत, नाखेत, पल्यूड़खेत, हट्यूड़खेत, जाल, सर्पमाफी, सूपाकोट, बिजोरिया, भाट नयालजूला, बैगनिया, तल्लाखेत फल्यां, धौलाड़, रतुराठ समेत सभी 25 नहरें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। इसके चलते नहरों से पिछले दो माह से पानी की आपूर्ति ठप पड़ी है और काश्तकार परेशान हैं।
काश्तकारों ने जून में धान की पौध खेतों में लगाई। सिंचाई नहरों की मरम्मत नहीं हो पाने से धान की फसल को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों ने सिंचाई विभाग से क्षतिग्रस्त नहरों को दुरुस्त कर पानी चालू करने की मांग उठाई है। सिंचाई विभाग के अवर अभियंता एससी उपाध्याय ने बताया कि बारिश के चलते क्षतिग्रस्त नहरों के हेडबंध दुरुस्त नहीं हो पाए हैं। बारिश थमने के बाद दुरुस्त कर दिए जाएंगे।
