अपने पत्थर दिल हुए तो गैर बने ‘अपने’

पांवटा साहिब (सिरमौर)। एक तरफ वो पत्थर दिल मां, जिसने नवजात अनामिका (काल्पनिक नाम) बच्ची को पैदा होते ही मरने के लिए कूड़ेदान में फेंक दिया। दूसरी तरफ, एक ऐसी मां जो इस बच्ची को अपने कलेजे का टुकड़ा बनाने को तड़फ रही है। शिलाई क्षेत्र का एक जोड़ा इस लावारिस मिली नवजात बच्ची को भगवान की अनमोल धरोहर समझ कर अपनाने को तैयार है। इसके लिए दंपति ने प्रशासन को आवेदन कर दिया है।
विगत 14 अगस्त को देश भर के हर कोने में स्वतंत्रता दिवस की तैयारियां चल रही थीं। चारों तरफ खुशी का माहौल था। ऐसे में देर शाम करीब 8 बजे किसी अज्ञात ने नवजात बच्ची को जन्म देते ही, तारुवाला के समीप कूड़ेदान में फेंक दिया। तारुवाला में एक नवजात के कूड़ेदान में फेंकने की सूचना पुलिस तक पहुंची। सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुंची। कूड़ेदान में नवजात बच्ची की सांसे चल रही थीं। पुलिस टीम ने मुस्तैदी दिखा कर बच्ची को सिविल अस्पताल पांवटा पहुंचाया। जहां पर चिकित्सकों ने बच्ची का उपचार शुरू किया। अब बच्ची स्वास्थ्य लाभ ले रही है। युवा दंपति का कहना है कि ‘अमर उजाला’ में 15 अगस्त के अंक में खबर पड़ी। इसके बाद पांवटा अस्पताल में बच्ची को देखने पहुंचे। बच्ची को देख कर दंपति, इस अनाथ मासूम नवजात बच्ची का सहारा बनना चाहता है। बच्ची को गोद लेने के लिए तमाम औपचारिकताओं को पूरा करने में वह जुट गए है। क्षेत्र में दंपति के बच्ची को गोद लेने और पालन पोषण करने के निर्णय को खूब सराहा जा रहा है। उधर, एसडीएम पांवटा श्रवण मांटा ने बताया कि इस बारे में एक दंपति ने संपर्क किया है। दंपति को इस बच्ची को गोद लेने की तमाम औपचारिकताओं और प्रक्रियाओं को पूरा करने को कहा गया है।

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