इनसे कब मिलेगी आजादी

आज हम स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं। आजाद हवा में सांस लेते हुए हर्ष की अनुभूति हो रही है। 15 अगस्त 1947 से पहले गुलामी की जंजीरों में जकड़े भारतीयों को कितने कष्ट सहने पड़े होंगे, उनके बारे में सोचकर ही रूह कांप उठती है। आज देश तो आजाद हो गया है लेकिन शहर में कई समस्याओं का मकड़जाल इस तरह जकड़ा है कि उनसे मुक्ति की चाह हर हरिद्वारवासी रखता है। स्वतंत्रता दिवस पर आम आदमी जनप्रतिनिधियों और जिम्मेदार अधिकारियों से इन समस्याओं से मुक्ति दिलाने की दिशा में कदम उठाने की उम्मीद रखता है।

1: टूटी सड़कों से कब मिलेगी मुक्ति
हरिद्वार। शहर की टूटी सड़कों से हर नागरिक परेशान है। इनसे कब मुक्ति मिलेगी सपना बनकर रह गया है। धर्मनगरी को यह सौभाग्य प्राप्त है कि छह वर्ष बाद अर्द्धकुंभ और 12वें वर्ष में कुंभ होता है। यानी छह वर्ष सड़कों को पुनर्निर्माण होता है। प्रत्येक वर्ष बारिश से पहले व बाद में सड़कों के गड्ढों की मरम्मत के नाम पर लोनिवि लाखों रुपयेे का बजट खर्च करता है। बावजूद इसके एक भी सड़क गड्ढा मुक्त नहीं है।

2: अतिक्रमण की बीमारी कब छोड़ेगी
हरिद्वार। लाइलाज होते अतिक्रमण ने धर्मनगरी की सूरत बिगाड़ कर रख दी है। मुख्य सड़क से लेकर गली-मुहल्ले तक की सड़कें संकरी गलियां बन गई हैं। भोलागिरि रोड, भल्ला रोड, पत्तों वाली गली, श्रवणनाथ मठ क्षेत्र कुशावर्त घाट गऊघाट, रामप्रसाद गली और बड़ा बाजार तो अतिक्रमण से इतना संकरा हो गया है कि आपात स्थिति में एंबुलेंस और आग लगने पर फायर गाड़ी तक नही जा पाती।

3: निकासी की समस्या से चाहिए मुक्ति
हरिद्वार। जल निकासी की व्यवस्था न होने से पंचपुरी के लोग परेशान हैं। शहर के अनियोजित विकास को नियोजित करने के नाम पर बने हरिद्वार विकास प्राधिकरण ने घोषित उद्देश्य के अनुरूप काम नहीं किया। अनियोजित विकास ने निकासी के नदी-नालों को गायब कर दिया है। हालांकि अब जेएनएनयूआरएम में ड्रेनेज का मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है, जिससे भविष्य में राहत की उम्मीद बंधी है।

4 : बाहर निकलने की आजादी नहीं
हरिद्वार। आर्थिक संपन्न होते हरिद्वार की आदत खासोआम की जान पर भारी पड़ रही है। शराब पीकर सड़कों पर गाड़ियां दौड़ाना रईसजादों की आदत बन गई है। आए दिन सड़क पर हादसे हो रहे हैं। राहगीर जान गवां रहे हैं। हेलमेट अभियान में डटी पुलिस शराब पीकर वाहन चलाने वाले अमीरजादों पर ठोस कार्रवाई नहीं कर रही है। आलम यह है कि लोगों का रात को घर से निकलना दूभर हो गया है। भेलकर्मी और उनकी माता की मौत इसका ताजा उदारहण है।

5 : बढ़ते अपराध से छुटकारा दिलाइए
हरिद्वार। शहर में बढ़ता अपराध भी चिंता का विषय है। चोरी, लूट और डकैती की घटनाओं ने लोगों को आतंकित कर रखा है। इनका खुलासा भी नहीं हो रहा है। पॉश कालानियों को निशाना बनाया जा रहा है। यही नहीं ठगी और धोखाधड़ी के मामले भी बढ़ रहे हैं। हाल ही में द्वारिका विहार में डकैती और शिवालिक नगर में लूट की वारदातें इसका ताजा उदाहरण है। बढ़ते अपराध से भी लोगों को आजादी चाहिए।

6 : जाम से कब मिलेगी निजात
हरिद्वार। शहर की सबसे बड़ी समस्या जाम से खासोआम परेशान है। छोटे स्नान पर्वों पर ही शहर की मुख्य सड़कों से लेकर राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाम लग जाता है। बड़े स्नान पर्वों पर तो लोग घरों में दुबकने को मजबूर हो जाते हैं। इस दौरान लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लोग घंटों हाईवे पर फंसे रहते हैं। यातायात व्यवस्था चरमरा जाती है। वहीं एक ही मार्ग पर ऑटो रिक्शाओं का रेला भी मध्य मार्ग पर जाम का सबब बनता है।

7 : खनन माफिया राज से कब मिलेगी मुक्ति
हरिद्वार। जिले में खनन माफिया का राज बिना किसी खौफ के चल रहा है। जिले में नदी-नालों से लेकर सरकारी और निजी भूमि पर जमकर अवैध खनन हो रहा है। यह खनन कई लोगों की जान भी ले चुका है। बावजूद इसके अवैध खनन पर रोक नहीं लग रही है। ऐसा लगता है जिला प्रशासन ने अवैध खनन के सामने घुटने टेक दिए हैं। गंगा किनारे ही अवैध खनन सामग्री की दुकान चल रही है और कार्रवाई करने वाला कोई नहीं है।

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