
चमोली जिले के देवाल और थराली क्षेत्र में अलग-अलग जगह बादल फटने से व्यापक नुकसान हुआ है। इसके साथ ही ऐतिहासिक केशोराय मठ बुधवार को अलकनंदा में समा गया।
केशोराय मठ कई दिनों से अलकनंदा नदी के बहाव से खतरे की जद में था। इस मठ की स्थापना सन् 1625 में साहित्यकार केशव के श्रीनगर (गढ़वाल की तत्कालीन राजधानी) पहुंचने के बाद हुई थी। सिंचाई विभाग मंदिर को बचाने के लिए वायरक्रेट डाल रहा था, लेकिन यह कोशिश कामयाब नहीं हुई। मंगलवार को मठ की नींव खोखली हो गई और बुधवार को मंदिर अलकनंदा में समा गया। अब यहां मठ के नाम पर एक छोटी सी दीवार ही बची है।
इसके अलावा चमोली जिले के देवाल और थराली क्षेत्र में अलग-अलग जगह बादल फटने से व्यापक नुकसान हुआ है। छह मकान ढह गए, सात मवेशी दबकर मर गए। चार घराट, आठ आरसीसी पुलिया बह गईं। कई मकान खतरे की जद में हैं। 100 किलोवाट की उरेडा द्वारा निर्मित लघु जल विद्युत परियोजना का पावर हाउस भी मलबे में दब गया।
धस रही है जमीन
उधर उत्तरकाशी के गुनाल गांव में लोग अलग तरह की आपदा झेल रहे हैं। यहां पक्के मकान अपने स्थान पर ही जमीन में धंसे जा रहे हैं। दो मकान जमींदोज हो चुके हैं और कई मकानों में दरारें पड़ गई हैं। दहशतजदां लोग अपने घरों को छोड़कर दूसरी जगह रह रहे हैं। जबकि चमोली जिले के कमेड़ा में बदरीनाथ हाईवे ध्वस्त हो गया है। लोग करीब आठ किमी जंगल और चट्टानों पर बनी पगडंडियों से गंतव्य तक पहुंच रहे हैं।
