बाईपास के विरोध में प्रदर्शन

खटीमा। प्रस्तावित पहेनियां बाया कुटरी बाईपास निर्माण के विरोध में तराई किसान भूमि सुधार समिति एवं पूर्व सैनिक संगठन के सदस्यों ने जुलूस निकाला और तहसील परिसर में धरना दिया। पूर्व सैनिकों का आरोप था कि काश्तकारों को विश्वास में लिए बगैर नेशनल हाईवे अथारिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) के अधिकारियों ने सर्वे किया है। जिस जगह का सर्वे किया गया है उन जमीनों में वह काश्तकार काबिज हैं जिनके नाम पर जमीन नहीं हैं। यदि अधिग्रहीत जमीन का मुआवजे देेने की बात हुई तो वह जमीन के मूल खातेदार को दिया जाएगा। वक्ताओं ने कहा कि जब तक जमीन का बंदोबस्त नहीं होता वह बाईपास का निर्माण नहीं होने देंगे।
बाईपास निर्माण के विरोध में कैनाल डाक बंगले में जमा पूर्व सैनिक व गैर थारु काश्तकार जुलूस की शक्ल में तहसील पहुंचे। तहसील में आयोजित धरने में वक्ताओं ने कहा कि एनएचआई पहेनियां से सुजिया, उमरुकलां, उमरुखुर्द, बिगराबाग, नदन्ना से कुटरी तक 8.037 किलोमीटर का बाईपास बना रहा है।
जिस जमीन पर बाईपास बनाया जा रहा है उसे जनजाति के परिवारों ने गैर जनजाति पूर्व सैनिकों व अन्य काश्तकारों को बेचा है। जनजाति की जमीनों पर खरीद फरोख्त पर शासन से रोक होने के कारण आज भी वह जमीन जनजातियों के नाम पर दर्ज है। यदि सरकार जमीन का मुआवजा देगी तो वह काबिज काश्तकार को न देकर अभिलेखों में दर्ज काश्तकारों को मिलेगा।
पूर्व सैनिकों ने उपजिलाधिकारी हेमंत कुमार वर्मा के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर विरोध जताया। इस अवसर पर कै. शेर सिंह दिगारी, कुंवर सिंह खनका, महेश जोशी, भगवान जोशी, दया किशन कलोनी, दामोदर पाटनी, लक्ष्मण सिंह, भूपेंद्र सिंह खोलिया, कै. गोपाल सिंह, दीवान सिंह सैल्ला, जीवन सिंह मेहता, वासुदेव पुनेठा, हरिकिशन, कमल रुमाल, भीम चंद, मानी चंद, गीता देवी, हीरा देवी, निर्मला मेहता, जानकी धामी, चंद्रकला देवी, देवकी देवी, राधिका जोशी, लीला देवी, मीना देवी, दान सिंह बिष्ट, जनक चंद, कुंडल चंद आदि थे।

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