
शिमला। 17 अगस्त को केंद्रीय छात्र संघ चुनावों में वोटर छात्र संगठनों के प्रत्याशियों को वोट क्यों दे? इसके लिए सभी संगठनों ने अपने चुनावी मुद्दे तैयार कर रखे हैं। इस बार के चुनावों में कालेजों में आधारभूत ढांचे और शिक्षकों की कमी सबसे अहम मुद्दा है।
हालांकि, हर परिसर में चुनावी मुद्दे कालेज की समस्याओं के आधार पर है, लेकिन पूरे प्रदेश में छात्र संगठनों ने कॉमन मुद्दे तैयार कर प्रत्याशी चुनावी समर में उतारे हैं। इसमें कालेजों में शिक्षा का निजीकरण, फीस बढ़ोतरी रूसा के लागू होने के बाद सुविधाओं की कमी और छात्र समस्याओं के लिए संघर्ष करने के मुद्दे हैं। इसके अलावा विवि में लड़कियों के छात्रावासों का मसला सबसे अहम है। लड़कों के छात्रावासों में मैस की बेहतर व्यवस्था करने के लिए मामला प्रशासन के समक्ष उठाने के वायदा आम छात्रों से किया जा रहा है। विश्वविद्यालय में लोकल छात्रों के लिए अतिरिक्त बसें लगाना, कक्षाओें और विभागों में बेहतर सुविधाएं मुहैया करवाना और पुस्तकालय में किताबें और बैठने की सुविधाएं मुहैया करवाने की मांगों को शामिल कर छात्र संगठनों के प्रत्याशी आम छात्रों से वोट मांग रहे हैं।
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एनएसयूआई
– पढ़ो और पढ़ने दो के फार्मूले पर शांत परिसर बनाएंगे।
– कालेजों में आधारभूत ढांचा मिलेगा, शिक्षकों की तैनाती होगी।
– पूर्व सरकार के समय में बने झूठे केस वापस करवाएंगे।
– कालेज में गरीब छात्राओं को विशेष छात्रवृत्ति का वायदा।
– विवि मेें कन्या छात्रावासों का निर्माण होगा।
(यदुपति ठाकुर अध्यक्ष एनएसयूआई)
एबीवीपी
– रूसा के खिलाफ लड़ाई लड़कर राहत दिलाएंगे।
– प्रदेश सरकार और विवि प्रशासन की छात्र विरोधी नीतियों का विरोध होगा।
– कालेजों में आधारभूत ढांचा और शिक्षक मुहैया करवाने की मांग उठेगी।
– फीस बढ़ोतरी और निजी करण स्वीकार नहीं होगा।
– शैक्षणिक और बेहतर माहौल मुहैया करवाना होगा लक्ष्य।
(अजय ठाकुर, एबीवीपी राज्य महामंत्री)
एसएफआई
– छात्र हितों के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
– कालेजों में आधारभूत ढांचा और शिक्षकों की मांग सरकार के समक्ष रखेंगे।
– विवि सहित कालेजों की फीस बढ़ने नहीं दी जाएगी, निजीकरण का विरोध करेंगे।
– कन्या छात्रावासों का निर्माण की मांग करेंगे, मैस सिस्टम बेहतर करना
– बेहतर शैक्षणिक माहौल और सुविधाओं की मांग प्रशासन से उठाएंगे।
