सुधा ने दी थी पांच लाख की सुपारी…

सुधा पटवाल ने युद्धवीर की हत्या के लिए पांच लाख की सुपारी दी थी। हत्या में सुधा के अलावा तीन लोग और मौजूद थे, जिनमें दो वेस्ट यूपी के कुख्यात बदमाश हैं।

बुलंदशहर से हरिओम वशिष्ट की गिरफ्तारी के बाद उसने यह खुलासा किया है। उसने बताया कि सुधा ने उसके आठ लाख रुपये वापस करने थे। यही रुपये वापस लेने वह अपने एक साथी के साथ दून आया था। यहीं सुधा ने युद्धवीर की हत्या के लिए उसे पांच लाख रुपये की सुपारी दी थी।

हरिओम उर्फ बिट्टू पुत्र ब्रजपाल निवासी शास्त्री नगर, जिला मेरठ की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को पता चला कि पूछताछ में सुधा ने आधी बात ही बताई है। हरिओम के अनुसार, सुधा उसकी पुरानी परिचित है। सुधा ने कुछ माह पहले उसे बताया था कि दून के झाझरा गांव में पांच बीघा जमीन बिक रही है। इस जमीन के लिए सुधा ने उससे आठ लाख रुपये एडवांस� लिए थे। लेकिन जब हरिओम को जमीन के कागजात दिए गए तो वह फर्जी निकले।

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तब से हरिओम सुधा से अपने रुपये वापस मांग रहा था। लेकिन सुधा हर बार फोन पर उसे टरका देती। 31 जुलाई को सुधा ने उसे फोन किया और कहा कि वह एक अगस्त को अपने रुपये लेने दून आ जाए।

एक अगस्त को हरिओम अपने साथी उमेश चौधरी पुत्र मदन पाल निवासी कैल थाना, जिला शामली के साथ दून पहुंच गया। यहां वह दोनों त्यागी रोड पर स्थित एक होटल में ठहरे।

सुधा हरिओम से मिली और उसे कहा कि युद्धवीर को भी उसे 14 लाख रुपये वापस करने है। रुपये वापस न दिए तो युद्धवीर उसकी हत्या करवा देगा। उसने हरिओम को एक प्लान बताया। प्लान के अनुसार, वह हरिओम को युद्धवीर के पास अनिल श्रीवास्तव बनाकर ले गई।

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वहां हरिओम ने युद्धवीर से कहा कि वह एमबीबीएस में दाखिल करवा देगा। इसलिए वह अभी सुधा से 14 लाख रुपये वापस न मांगे। लेकिन युद्धवीर ने उसे दो टूक कह दिया कि वह बीच में न आए और न ही उसे अब दाखिला चाहिए। लिहाजा, सुधा को रुपये वापस करने ही होंगे। उसके बाद युद्धवीर वहां से चला गया।

उसके जाने के बाद सुधा ने हरिओम को फिर से कहा कि युद्धवीर उसकी हत्या करवा देगा। उसने हरिओम को ऑफर दिया कि अगर वह युद्धवीर को रास्ते से हटा दे तो वह उसके रुपये उसी समय वापस कर देगी। साथ ही पांच लाख रुपये भी अलग से देगी।

हरिओम और उमेश ने हत्या को अंजाम देने के लिए अपने एक और साथी संजीव निवासी कनखल जिला हरिद्वार को भी आठ अगस्त को दून बुला लिया। संजीव और उमेश पर उत्तराखंड और गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर, मोदीनगर और मेरठ में हत्या, हत्या के प्रयास समेत विभिन्न आपराधिक धाराओं में मुकदमे दर्ज हैं। तीनों ने मिलकर सात अगस्त को हत्या करने की योजना बनाई।

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आठ अगस्त की शाम को सुधा ने युद्धवीर रावत को इंद्रानगर स्थित वैभव स्वीट्स पर 14 लाख रुपये वापस लेने के लिए बुलाया। सुधा स्कूटी पर थी और उमेश और हरिओम कार से आए। उसके बाद सुधा ने हरिओम और उमेश को डीआईटी इंस्टीट्यूट के पास मौजूद रहने को कहा।

जबकि सुधा अपनी स्कूटी से युद्धवीर को लेने चली गई। उसके बाद चारों ने मिलकर उसकी हत्या कर दी। एसएसपी केवल खुराना ने बताया कि उमेश और संजीव को भी जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

युद्धवीर को हो गया था शक
सुधा ने युद्धवीर को यह कहा कि उसके रुपये उसने राजपुर रोड स्थित एक रिश्तेदार के घर रखे हुए हैं। सुधा युद्धवीर को अपने साथ स्कूटी पर लेकर गई। लेकिन डीआईटी के पास उसने युद्धवीर को बताया कि सड़क किनारे कार खड़ी है और उसमें हरिओम बैठा हुआ है। उसके पास ही रुपये हैं।

स्कूटी एक तरफ खड़ी कर सुधा कार संख्या डीएल 3 सीएन 8965 में आगे वाली सीट पर बैठ गई। ड्राइविंग सीट पर हरिओम बैठा हुआ था। जबकि कार में पीछे उमेश और संजीव बैठा हुआ था।

उन्होंने युद्धवीर को सुधा के पीछे वाली सीट पर खिड़की की तरफ से बैठा लिया। उसके बाद हरिओम ने युद्धवीर को कहा कि वह सुधा से रुपये न मांगे। हरिओम के अनुसार, युद्धवीर को शक हो गया था कि वह उसकी हत्या करने वाले है। युद्धवीर ने चुपके से दरवाजा खोला और भागने लगा। उमेश उसके पीछे भागा और उसके धक्का दे दिया। युद्धवीर और उमेश दोनों नीचे गिर गए और दोनों को चोटें आईं।

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युद्धवीर को फिर से जबरदस्ती कार में बैठाया गया और कार में पहले से मौजूद रस्सी से गले में फंदा लगाकर उसकी हत्या कर दी गई। हत्या करने के दौरान सुधा काफी तेश में थी और युद्धवीर को गालियां बक रही थी। जब वह मर गया तो सुधा अपनी स्कूटी पर बैठ कर चली गई। जबकि उन्होंने उसकी लाश आनंदमयी आश्रम के बाहर फेंक दी।

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