जीरो वैल्यू बसों में सुरक्षित नहीं सफर

धर्मशाला। बरसात के मौसम में लोग निगम की बसों में जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं। निगम के पांच डिपो में 54 जीरो बुक वेल्यू बसें चल रही हैं। कागजो में बसें निर्धारित किलोमीटर का सफर तय कर चुकी हैं। मगर, निगम के पास नई बसें न आने के कारण इन बसों को दौड़ाना पड़ रहा है। जीरो बुक वैल्यू बसें लंबे रूटों में भी चलाई जा रही हैं। इनमें कुछेक मिनी बसें भी शामिल हैं।
बरसात के मौसम में जहां सड़कों का हाल बेहाल है, वहीं हिमाचल परिवहन निगम की पुरानी बसें भी इन जोखिम भरे रास्तों पर खूब दौड़ रही हैं। तंग और खराब सड़को में निगम की बसें कभी भी जवाब दे सकती हैं। इससे बड़ी घटना होने का भी अंदेशा बना हुआ है। हर साल जीरो बुक वेल्यू बसों की संख्या कम होने के बजाय बढ़ रही है। इन बसों को अति दुर्गम इलाकों में भी भेजा जा रहा है। निगम के सूत्र खुलासा करते हैं कि इस समय बैजनाथ डिपो में 6, पालमपुर में 5, धर्मशाला में 8, पठानकोट में 10 और चंबा में 25 बसें जीरो बुक वेल्यू की चल रही हैं। चंबा डिपो के अंतर्गत दर्जनों रूटों में जीरो बुक वेल्यू बसें चल रही हैं। इन बसों की निगम हर रोज मरम्मत करने के बाद रूटाें पर चला रहा है। ये बसें नई बसों के मुकाबले डेढ़ से 2 लीटर तक डीजल की खपत भी ज्यादा कर रही हैं। उधर, एचआरटीसी के डीएम विजय सिंह सिपहिया ने बताया कि पांच डिपो में जीरो बुक वेल्यू बसें चल रही हैं। डिपो को नई बसें मिलने पर इस बसों की सेवाएं नहीं ली जाएंग
एचआरटीसी की बसों को 8 लाख किलोमीटर चलने के बाद जीरो बुक वेल्यू घोषित कर दिया जाता है। जबकि मिनी बसों को साढे़ छह लाख किलोमीटर चलने के बाद जीरो बुक वेल्यू घोषित किया जाता है। ये तमाम बसें अपने निर्धारित किलोमीटर चल चुकी हैं।

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