राजजात में शामिल नहीं होगी कुरुड़ समिति

गोपेश्वर/घाट। आपदा की मार को देखते हुए आखिरकार मां नंदा के सिद्धपीठ कुरुड़ की समिति ने राजजात में शामिल होने के बजाय स्थानीय स्तर पर लोकजात आयोजित करने का फैसला किया है। साथ ही राजजात के दौरान कुरुड़ में होने वाले नंदा अष्टमी के तीन दिवसीय मेले को भी स्थगित कर दिया है।
सिद्धपीठ कुरुड़ में रविवार को हुई बैठक में समिति के अध्यक्ष मंशाराम गौड़ ने कहा कि श्री नंदा देवी राजजात शुरू होने में अब मात्र 18 दिनों का समय शेष है। यात्रा मार्ग तहस-नहस पडे़ हैं। ऐसे में राजजात आयोजित करना किसी बड़ी दुर्घटना को न्योता देना जैसा है, लिहाजा स्थानीय स्तर पर लोकजात आयोजित कर धार्मिक परंपराओं का निर्वहन किया जाएगा।
बताया गया कि 30 अगस्त को मां नंदा की डोली कुरुड़ से प्रस्थान कर विभिन्न पड़ावों से होते हुए 12 अगस्त को वेदनी कुंड पहुंचेगी। यहां से मां नंदा की डोली पूजा-अर्चना के बाद छह माह के प्रवास के लिए अपने ननिहाल देवराड़ा पहुंचेगी। दशोली क्षेत्र से आने वाली नंदा देवी की डोली भी बालपाटा बुग्याल तक जाएगी, जहां पूजा-अर्चना के बाद डोली सिद्धपीठ कुरुड़ लौटेगी। कहा गया कि केदारनाथ त्रासदी को देखते हुए राजजात के दौरान कुरुड़ में आयोजित होने वाले तीन दिवसीय मेले का आयोजन भी नहीं होगा। बैठक में ब्लॉक प्रमुख ममता गौड़, कमलेश गौड़, वीरेंद्र सिंह रावत, हयात सिंह कठैत, कन्हैया प्रसाद गौड़, राकेश गौड़, मुंशी चंद्र गौड़, सुखवीर सिंह रौतेला सहित कई लोग मौजूद थे।

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