खाली रहीं बीटेक की 92 फीसदी सीटें

सोलन। इसे प्रदेश के युवाओं का इंजीनियरिंग या बीटेक की ओर कम रुझान कहें या निजी संस्थानों की भारी-भरकम फीस और गुणात्मक शिक्षा में कमी अथवा फिर जेईई/पैट (ज्वाइंट एंट्रेंस एग्जाम और पॉलीटेक्निक एप्टीट्यूड टेस्ट) की शर्त। वर्ष 2013-14 में सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों में एडमिशन के नतीजे खासे निराशाजनक रहे हैं। प्रदेश तकनीकी विवि 31 जुलाई को बीटेक और इंजीनियरिंग डिप्लोमा कोर्सों की काउंसलिंग खत्म कर चुका है, मगर अभी भी प्रदेश के कॉलेजों में बीटेक की 92 फीसदी सीटें खाली हैं। इंजीनियरिंग डिप्लोमा कोर्सों में 57 फीसदी सीटें खाली हैं। लिहाजा, सूबे में इंजीनियरिंग छात्रों की कम होती संख्या निजी क्षेत्र के साथ-साथ सरकारी क्षेत्र के लिए भी चिंता का विषय बनती जा रही है।

बीटेक का सूरतेहाल
प्रदेश में 6500 सीटों के लिए 14881 छात्र बीटेक में दाखिले के लिए जेईई टेस्ट में बैठे। महज 1629 छात्रों के आवेदन काउंसलिंग के लिए पहुंचे। 500 छात्र काउंसलिंग के लिए आए। इनमें 492 सेलेक्ट हुए। 338 को सरकारी कॉलेज मिले, जबकि 154 छात्र 17 प्राइवेट कॉलेज के लिए चुने गए।

इंजीनियरिंग डिप्लेमा कोर्सों का हाल
इंजीनियरिंग डिप्लोमा कोर्सों में 17000 युवा टेस्ट के लिए पहुंचे। 9690 सीटों से पैट की शर्त पूरी कर 5000 ने काउसंलिंग को आवेदन किया। इसमें 4253 छात्र चुने गए। 4000 छात्रों को सरकारी पॉलीटेक्निक और 253 को प्राइवेट संस्थानों में भेजा गया।

आज मिलेंगे मुख्यमंत्री से
हिमाचल प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेज एसोसिएशन के अध्यक्ष आरके अभिलाषी का कहना है कि काउसलिंग देरी से होने के कारण छात्र पंजाब, हरियाणा में पलायन कर गए। इससे दाखिले कम हो पाए। मुख्यमंत्री से आज मिलकर छूट मांगी जाएगी। प्रदेश अनएडिड पॉलीटेक्निक संस्था के अध्यक्ष कृपाल पसरिचा ने जेईई और पैट की शर्त में पंजाब और हरियाणा की तर्ज पर छूट मांगी है।

सरकार ही लेगी निर्णय : मनोज
प्रदेश तकनीकी विवि के रजिस्ट्रार मनोज कुमार ने कहा कि कम एडमिशन सरकारी के साथ निजी क्षेत्र के लिए चिंता की बात है। हो सकता है निजी संस्थानों में भारी-भरकम फीस या पंजाब और हरियाणा में जेईई और पैट की शर्त न होने से छात्रों ने पलायन किया हो। 31 जुलाई को काउंसलिंग खत्म हुई थी। निजी विवि 15 तक तय मैनेजमेंट कोटे की सीटें भर सकते हैं। निजी प्रबंधकों की मांगों पर सरकार ही निर्णय लेगी।

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