
नारायणबगड़। आपदा से पहले ही प्रभावित उत्तरी कड़ाकोट के गांवों पर कुदरत का एक और कहर बरपा है। चिरखून गांव के ऊपर बादल फटने से गांव की सभी सड़कें और पैदल मार्ग ध्वस्त हो गए। पांच घराट (पनघट) सहित जीआईसी कोठली को जोड़ने वाली पुलिया भी गदेरे के उफान में समा गई। गडनी गदेरे पर बनी तीन अन्य पुलियाएं भी ध्वस्त हो गई, जिससे क्षेत्र के कई गांवों का ब्लाक मुख्यालय नारायणबगड़ से संपर्क पूरी तरह से कट गया है। अब पांच किमी की पैदल दूरी 18 से 25 किमी में तब्दील हो गई है। इन हालातों में क्षेत्र में जरूरी वस्तुओं का संकट गहराने के आसार भी पैदा हो गए हैं।
शनिवार मध्य रात्रि के बाद चिरखून और भेतरा गांव के बीच जंगल में बादल फटने से व्यापक तबाही हुई है। चिरखून के ग्रामीणों के सौ सिंचित खेत मलबे और गदेरे के उफान में समा गए हैं। ग्रामीण मथुरा प्रसाद, भजी राम, देवी प्रसाद, जय सिंह और आनंद सिंह के घराट भी नहीं बचे। गांव के शंभू प्रसाद की गौशाला भी ध्वस्त हो गई। ग्राम प्रधान सुशील कांति ने बताया कि गड़नी गदेरे पर बनी तीन पुलियाएं भी पानी के उफान में बह गई हैं, जिससे क्षेत्र के 12 गांवों का आपस में संपर्क कट गया है। चिरखून गांव की तीन सिंचाई नहरें और तीन सुरक्षा दीवारें भी ध्वस्त हो गई हैं। भंगोटा में विद्युत लाइन क्षतिग्रस्त होने से गांवों में अंधेरा पसरा हुआ है। भेतरा गांव के पंचायत घर को भी खतरा पैदा हो गया है।
स्कूृल जाना भी हुआ मुश्किल
चिरखून और सैंज के बच्चों का स्कूल जाना भी दूभर हो गया है। गांव से जीआईसी कोठली तक जाने वाले मुख्य पैदल मार्ग पर घटगाड़ में बनी पुलिया भी गदेरे के उफान में बह गई है। यही नहीं गांव के अन्य पैदल मार्ग भी पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए हैं। नारायणबगड़ आने वाला पैदल रास्ता भी हादसों का सबब बन चुका है।
इन गांवों का कटा संपर्क
उत्तरी कड़ाकोट पट्टी के जाखपाटियूं, सैंज, कोठली, कफारतीर, भटियाणा, चिरखून, कोट, भुलक्वाणी, सुनभी, कोथरा, पलसारी, लोदला, बेथरा गांव का 15 जून के बाद से कर्णप्रयाग और नारायणबगड़ जाना तो मुश्किल हो ही रखा था, शनिवार रात को बादल फटने के बाद से इन गांवों का आपस में भी संपर्क पूरी तरह से कट गया है।
