
लोहाघाट। बगैर शिक्षकों के सरकार द्वारा संचालित किए जा रहे पॉलीटेक्निक से बच्चे कितनी शिक्षा ले रहे होंगे यह सवाल हर किसी की जुबान पर है। लोहाघाट के राजकीय पॉलीटेक्निक में 2002 में आईटी पाठ्यक्रम खोला गया, जिसका उद्देश्य था कि सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में यहां के युवक और युवतियां भी अपना योगदान दे सकें। इसका एक दुर्भाग्यपूर्ण पहलू यह है कि बीते 11 वर्षों में अभी तक इस विषय से संबंधित कोई भी पद शासन ने स्वीकृत नहीं किया। इस पाठ्यक्रम को संचालित करने के लिए एक विभागाध्यक्ष, चार प्रवक्ता और एक कंप्यूटर प्रोग्रामर का होना अनिवार्य है।
अन्य विषयों की तरह इस विषय को ही अतिथि व्याख्याताओं के सहारे संचालित किया जा रहा है। पॉलीटेक्निक में संचालित सिविल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रानिक्स इंजीनियरिंग, फार्मेसी आदि ट्रेडों में भी विभागाध्यक्ष समेत प्रवक्ताओं, जूनियर प्रवक्ताओं और अनुदेशकों के तमाम पद रिक्त हैं। यह स्थिति लंबे समय से चली आ रही है। अभिभावक प्रकाश चंद्र, बहादुर सिंह, गिरीश चंद्र आदि का कहना है कि इस दिशा में न तो सरकार कुछ कर रही है और न ही जनप्रतिनिधि ही कोई आवाज उठा रहे हैं। जिसके कारण बच्चों का भविष्य अंधकार में पड़ा हुआ है। प्रधानाचार्य राजीव सिंह का कहना है कि रिक्त पदों की जानकारी शासन को दे दी गई है।
