अंग्रेजों का कानून आज भी लागू

शिमला। हम भले ही आज आजादी का 66वां वर्ष मना रहे हैं, मगर अंग्रेजी शासनकाल की छाया से हमें आज भी मुक्ति नहीं मिली है। स्वतंत्रता प्राप्ति के साढे़ छह दशक के बाद भी हम अपने स्वतंत्र कानून-कायदे नहीं बना पाए हैं। पुराने जमाने में बने कानूनों का ही सहारा ले रहे हैं। ऐसे दर्जनों कानून अब और तब के समय का भेद कर अपने में बदलाव चाह रहे हैं, पर हम ऐसा नहीं कर पाए। हिमाचल भी इस बारे में उदासीन नजर आता है। अभी तक हिमाचल पुलिस वर्ष 1934 में बने पंजाब पुलिस रूल्स से ही काम चला रही है।
हिमाचल के प्रथम डीजीपी आईबी नेगी ने वर्ष 1987 से लेकर 1990 के अपने कार्यकाल के बीच हिमाचल सरकार का अपना पुलिस कानून बनाने की जरूरत महसूस की। उन्होंने अपना पुलिस एक्ट और रूल्स बनाने का प्रस्ताव बनाया। इसके बाद बदलाव की प्रक्रिया शुरू हुई, मगर हिमाचल की हुकूमतें ज्यूं-ज्यूं बदलती रहीं, त्यूं-त्यूं इस प्रस्ताव को लेकर कभी जागरूक तो कभी उदासीन बनी रहीं। इसके बाद कई वर्षों की रिहर्सल के बाद सबसे पहले हिमाचल प्रदेश पुलिस एक्ट को वर्ष 2007 में बना तो दिया गया, मगर अभी तक इसके रूल्स नहीं बने हैं। हिमाचल प्रदेश पुलिस एक्ट 2007 से पहले इंडियन पुलिस एक्ट 1861 से ही काम चलाया जा रहा था। अब एक्ट तो यहां हिमाचल पुलिस का अपना लागू हैं, मगर अभी तक इसके अपने नियम नहीं बनाए जा सके हैं। अब तक वर्ष 1934 के बने पंजाब पुलिस रूल्स से ही काम चलाया जा रहा है।
उम्र में अस्सी पार हिमाचल के प्रथम डीजीपी आईबी नेगी ने माना कि अंग्रेजों के जमाने के पुलिस रूल्स की तरह पता नहीं कितने कायदे-कानून आज भी लागू हैं। इनकी ठीक से स्क्रूटिनी होनी चाहिए। अनावश्यक कानूनों को खत्म कर देना चाहिए। अंग्रेजों ने जो कानून बनाए, वे भारतीयों को नियंत्रित करने और अपने भले के ही बनाए। इन्हीं कानूनों से भारत के लोगों पर अत्याचार किया। ऐसे कानून-कायदे आखिर क्यों अपनाए जाने चाहिए? उन्होंने कहा कि हिमाचल पुलिस ने अपने एक्ट और रूल्स बनाने का प्रस्ताव 1987 से 1990 के बीच तैयार कर दिया था। उसके बाद सरकार बदली और अगली सरकार ने चुप्पी साध ली। अब सुना है कि 2007 में बने हिमाचल पुलिस एक्ट के बाद अपने रूल्स भी बनाए जा रहे हैं। पुलिस को अंग्रेजों का दिया बर्बर रूप छोड़कर आज जनमित्र की छवि अपनानी होगी। यह कानून में बदलाव के बिना संभव नहीं है।
आईपीसी, सीआरपीसी भी अंग्रेजों ने बनाए
शिमला। हिमाचल सहित पूरे देश में लागू आईपीसी और सीआरपीसी कानून भी तो अंग्रेजों के ही बनाए हैं। हालांकि , इनमें आंशिक संशोधन हुए हैं। आईपीसी और सीआरपीसी एक सदी से भी अधिक समय पहले अंग्रेजों ने बनाए थे। एविडेंस एक्ट भी उसी जमाने का बना हुआ है। सीआरपीसी में पहला संशोधन वर्ष 1973 में हुआ। सेवानिवृत्त डीजीपी आईबी नेगी ने कहा कि ऐसे कई कानूनों में इनकी मौजूदा जरूरत के हिसाब से बड़े बदलाव की जरूरत है।

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