काहिका उत्सव में चलेगा गालियों का दौर

पधर (मंडी)। पधर के सुराहण गांव में काहिका उत्सव में रविवार को काफी संख्या में श्रद्धालु पापों से मुक्ति पाने को काहिका की चारवेद के नीचे छिद्रा करवाने पहुंचे। बड़ादेयो हुरंग नारायण के सानिध्य में नरवेदी पंडितों ने काहिका स्थल पर चारवेद को स्थापित करने से पहले मुर्गण किया। भेड़ू की गर्दन को यहां जमीन में दबाया गया और फुटाखल के जंगल से रविवार रात लाई गई देवदार की चार बूटियों को चारों दिशा में खड़ा कर काहिका वेद सजाई गई। नड़ पंडितों की ओर से इसी चारवेद के नीचे मंत्रोच्चारण कर लोगों का छिद्रा करवाया गया। काहिका के प्रथम दिन सुराहण मंदिर में काफी भीड़ देखी गई। श्रद्धालुओं ने देव हुरंग नारायण के रथ के सामने शीश नवाया और बाद में छिद्रा करवाने चारवेद के पास गए। इस दौरान कई लोगों ने आपसी विवाद का समझौता करके चारवेद के नीचे छिद्रा करवाया। सुराहण गांव में काहिका उत्सव दो दिन तक चलेगा। इस उत्सव में हराबाग गांव के नड़ परिवार की विशेष भूमिका रहती है। उनका सहयोग देने जिला कुल्लू से भी नड़ परिवार के सदस्य सुराहण काहिका में पहुंचे हैं। परंपरा के अनुसार हराबाग के नड़ परिवार का कोई भी सदस्य घर पर नहीं रहते हुए काहिका की रस्म को निभाएगा। सोमवार शाम सुराहण गांव कुछ समय के लिए मातम में डूब जाएगा। काहिका की संपूर्ण रस्म को निभाते हुए नड़ सोम दत्त उर्फ गुड्डू देव हुरंग नारायण से आशीर्वाद लेकर पहले मृत देह को प्राप्त होंगे। उनकी अर्थी की परिक्रमा पूरे सुराहण गांव में होगी। नड़ के पुन: जीवन की मांग को लेकर परिवार के सभी सदस्य जमकर अश्लील भाषा का प्रयोग करेंगे। इस दौरान देव हुरंग का भेखले की लकड़ी का विशाल मोहरा नड़ की देह के साथ घुमाया जाएगा। बाद में देव शक्ति से नड़ गुड्डू जिंदा होकर परिवार सहित देव हुरंग नारायण से आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। काहिका उत्सव की इस बेला पर देव हुरंग नारायण का रथ गांव के एक छोर पर खड़ा रहेगा।

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