एबीवीपी दुर्ग बचाने, एनएसयूआई भेदने की फिराक में

धर्मशाला। धर्मशाला कॉलेज में इस बार छात्र संघ चुनाव रोचक होने के आसार हैं। चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं। छात्र संगठन चुनाव मैदान में कूद चुके हैं। इस बार एबीवीपी के लिए जहां अपने दुर्ग को बचाए रखने की चुनौती होगी, वहीं एनएसयूआई इसे भेदने की फिराक में रहेगी। हालांकि, धर्मशाला कॉलेज एबीवीपी का गढ़ ही रहा है लेकिन इस बार एनएसयूआई भी जोरशोर के साथ जीत के लिए तैयारियों में जुटी हुई है।
पिछले 13 साल में अधिकतर समय एससीए पर एबीवीपी का ही कब्जा रहा है। पांच वर्षों में मात्र एक बार ही एनएसयूआई दो सीटें जीतने में कामयाब हुई है। 2007 में एनएसयूआई और एसीएस के एक होने के बाद उप प्रधान पद पर इनका प्रत्याशी विजय रहा था। उसके बाद लगातार पांच साल विद्यार्थी परिषद ने एससीए पर कब्जा जमाए रखा। पिछले साल एनएसयूआई दो सीटों पर विजय पाने में कामयाब रही थी लेकिन एनएसयूआई के विजेता सह सचिव को अयोग्य ठहरा दिया गया। इसके चलते धर्मशाला कॉलेज की एससीए में प्रधान और उपप्रधान पदों पर एबीवीपी तथा महासचिव पद पर एनएसयूआई काबिज रही। प्रदेश के बड़े कॉलेजों में शुमार धर्मशाला महाविद्यालय में करीब 4500 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। ये अपने चुनाव अधिकार का प्रयोग करेंगे। हालांकि, दोनों छात्र संगठनों के नेताओं का मानना है कि एससीए पर उनका ही कब्जा होगा लेकिन इन दावों की सच्चाई 17 अगस्त को ही सामने आएगी।

एबीवीपी के जिला प्रमुख विशाल नेहरिया का कहना है कि कॉलेज में लाइब्रेरी में बेहतर किताबें और सुविधाएं दिलाना उनका चुनावी मुद्दा रहेगा।
एनएसयूआई के प्रदेश सचिव गौरव कुमार का कहना है कि छात्राओं के लिए कॉमन रूम, लाइब्रेरी में हर विषय की किताबें मुहैया करवाना, शांतिपूर्वक शैक्षणिक माहौल देना उनके मुद्दे रहेंगे।

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