
इंदौरा/धर्मशाला। पौंग बांध से लगातार छोड़े जा रहे पानी से रविवार को ब्यास नदी में बाढ़ आने से सैकड़ों लोगों पर आपदा आन पड़ी। घरों में पानी घुसने से पीड़ित परिवारों को साथ लगते क्षेत्रों के लोगों के घरों में शरण लेनी पड़ी। वहीं, प्रशासन की ओर से पीड़ित परिवारों को किसी भी प्रकार की मदद नहीं पहुंचाई गई। इंदौरा तहसील के अंतर्गत आते मंड क्षेत्र की सात पंचायतें जलमग्न हुई हैं। बाढ़ की चपेट में आने से करीब 50 मकान ढह गए हैं। दर्जनों मकानों में दरारें पड़ गई हैं। मंड क्षेत्र में 150 से ज्यादा घरों में पानी घुस गया है। लोगों का कीमती सामान बर्बाद हो गया है।
मंड की सात पंचायतों मंड मियानी, मंड सनौर, सुररढ़वा, पराल, ठाकुर, वडुखर, रियाली में दो से तीन फुट तक पानी घुस गया है। रविवार को कांगड़ा-चंबा के सांसद डॉ. राजन सुशांत ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया। उन्होंने जिला प्रशासन को इलाके में कैंप लगाकर लोगों को सुरक्षित स्थान पर ले जाने के निर्देश जारी किए हैं। बाढ़ में किसानों की फसलें भी बर्बाद हो गई हैं। बाढ़ में अभी और क्षेत्र भी चपेट में आ रहा है। प्रशासन अभी तक नुकसान का सही आकलन नहीं कर पाया है।
सांसद सुशांत का कहना है कि मंड में दर्जनों घर गिर चुके हैं। दर्जनों घरों में दरारें आई हैं। प्रशासन को प्रभावित क्षेत्र में जल्द राहत कार्य शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। पराल पंचायत के प्रधान कृष्ण कुमार का कहना है कि 50 से ज्यादा कच्चे मकान ढह गए हैं।
नूरपुर के एसडीएम अश्वनी सूद का कहना है कि जो मकान गिरे हैं, वहां पर लंबे अरसे से कोई नहीं रह रहा था। प्रशासन प्रभावित स्थल का दौरा कर राहत कार्य शुरू करेगा। मंड क्षेत्र में पानी भरने से सात पंचायतों के लिए एकमात्र सड़क सुरक्षित बची है। अन्य मार्गों की पुलियां क्षतिग्रस्त हो गई हैं। 150 से ज्यादा रिहायशी मकानों में पानी घुसने से नुकसान हुआ है।
