
देहरादून। सरकारी अस्पतालों में सही इलाज कराना है तो पहले स्वास्थ्य मंत्री से सिफारिश करवाइए। मंत्री जी की सिफारिश हो जाएगी तो ही डाक्टर आपकी ओर ध्यान रखेंगे, वर्ना काटते रहो चक्कर। जी हां, अपने खासों का ख्याल रखने के लिए स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी ने दून अस्पताल में अपने एक ओएसडी को ही तैनात कर दिया है। यही नहीं, खास मरीजों के लिए वह खुद भी डाक्टरों को फोन कर रहे हैं।
सरकारी अस्पतालों में छीछालेदर उन मरीजों की है, जिनकी कोई सिफारिश नहीं होती है। इन्हीं मरीजों को डाक्टर अपने नर्सिंग होमों में खींच ले जाते हैं। मरीज के नर्सिंग होम पहुंचने के बाद उसकी जेबें खाली करा ली जाती हैं। जब रोगी के पास पैसा खत्म हो जाता है तो उसे फिर सरकारी अस्पताल में धकेल दिया जाता है। यह सारी चीजें अधिकारियों को भी पता हैं, फिर भी गोरखधंधा चल रहा है।
दून अस्पताल में तैनात स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी के ओएसडी देवेंद्र सिंह असवाल का कहना है कि मंत्री जी के सिफारिशी और उनके क्षेत्र के लोग उनके पास आते हैं। इन मरीजों के संबंध में डाक्टरों को बता दिया जाता है। इसके अलावा मंत्री जी खुद भी फोन कर देते हैं। कितने मरीज आते हैं? कहते हैं कि यह आंकड़ा उन्होंने तैयार नहीं किया है।
