किसान बोले, बंद सड़कों को खुलवाए सरकार

गढ़वाल। पहले आपदा और अब बंद पड़ी सड़कों ने किसानों की कमर तोड़ दी है। उत्तरकाशी जिले में आलू और सेब की अगेती फसल सड़कें बंद होने से सड़ने के कगार पर है। सरकार ने आपदा प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए फल और सब्जी की सरकारी खरीद शुरू की है। गढ़वाल मंडल विकास निगम को इसका जिम्मा दिया गया है पर किसानों में इस योजना को लेकर कोई उत्साह नहीं है। वजह है सस्ती खरीद। किसानों का कहना है कि सरकार खरीद के बजाए उनकी उपज को बाजार तक पहुंचाने की व्यवस्था पर ध्यान दे। यानी बंद सड़कों को खुलवाने के लिए सरकार को गंभीरता से प्रयास करने चाहिए। ऐसी ही स्थिति कमोबेश टिहरी जिले के किसानों की है। वहां बारिश से सेब, आलू और गोभी की फसल फंगस और दूसरे रोगों की चपेट में आकर खराब हो रही हैं।

मौसम की बेरूखी, किसानों पर भारी
नई टिहरी। चंबा-मसूरी, नैनबाग, आगराखाल फल पट्टियों में आलू, टमाटर और सेब की फसल बर्बादी के कगार पर पहुंच गई है।
किसान आलू, सेब, टमाटर, आलू, करेला, कद्दू, शिमला मिर्च, तुरई जैसी फसलों को मंडी तक पहुंचा पाते इससे पहले ही बारिश हो गई। जिससे आलू खेत में ही सड़ गए। सेब में कालापन आ गया। अन्य सब्जियां भी रोग की चपेट में हैं। पहले यहां से प्रतिदिन 15 से 20 ट्रक फल और सब्जी मंडियों तक पहुंचते थे। इस बार एक-दो ट्रक भी बामुश्किल जा पा रहे हैं। किसान महावीर सिंह रावत और गोविंद सिंह के अनुसार मौसम की मार ने काश्तकारों की कमर तोड़ कर रख दी है। चंबा मसूरी फलपट्टी के अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह नेगी ने कूषि ऋण माफ करने की मांग की ळै। वहीं गढ़वाल विवि के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. विजयकांत पुरोहित का कहना है कि फंगस से सेब पर ब्लैक स्पाट की समस्या आ जाती है। इससे बचने के लिए नोवा 40 का छिड़काव करना चाहिए।
दैवी आपदा से जिन काश्तकारों के खेत क्षतिग्रस्त हुए है। उन्हें मुआवजा दिया जा रहा है। फसल का बीमा कराने वाले क्लेम कर सकते हैं।
-हितपाल सिंह, जिला उद्यान अधिकारी, टिहरी

खरीद के बजाए सड़क खुलवाए सरकार
उत्तरकाशी। गंगोत्री हाईवे बंद होने से अलग-थलग पड़े भटवाड़ी हर्षिल क्षेत्र में किसान कुल उत्पादन का अषाड़ी आलू 30 प्रतिशत तथा सेब 10 प्रतिशत उत्पादन करते थे। इस क्षेत्र में करीब दो हजार मीट्रिक टन आलू तथा पांच सौ मीट्रिक टन सेब की फसल से बर्बाद हो चुकी है। अगेती आलू निकालने के बाद किसान इन खेतों में कहीं राजमा, मटर तथा कुट्टू की फसल की बुआई भी करते लेकिन खेत खाली नहीं होने से ऐसा भी नहीं हो सका। दो फसलों की बर्बादी से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। अब किसान सरक ार की ओर से की जा रही सस्ती खरीद के प्रति भी ज्यादा उत्साहित नहीं दिख रहे हैं।
नटीण भटवाड़ी के महेंद्र पोखरियाल और भंगेली के कांति प्रसाद उनियाल कहते हैं कि इस बार आपदा ने काफी नुकसान पहुंचा दिया है।
जबकि हर्षिल के डा. नागेंद्र सिंह तथा सुक्की के मोहन सिंह राणा का कहना है कि आठ गांवों के बगीचों में 20 प्रतिशत अषाड़ी सेब की फसल बर्बाद हो गई है। सरकार सेब, आलू खरीदने की बात तो कर रही है, किंतु सितंबर-अक्टूबर तक गंगोत्री हाईवे पर यातायात बहाली के लिए ठोस प्रयास नहीं कर रही है।

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