सुप्रीमकोर्ट पहुंचा राशन कार्ड मामला

शिमला। बहुचर्चित नेपाली राशन कार्ड मामला अब सुप्रीमकोर्ट पहुंच गया है। नेपालियों ने हिमाचल हाईकोर्ट के निर्णय को सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष चुनौती दी है। अखिल भारतीय नेपाली एकता समाज की ओर से मामले की पैरवी कर रहे अधिवक्ता अश्वनी कुमार गुप्ता ने कहा कि सुप्रीमकोर्ट में एसएलपी दायर कर दी गई है। इस पर सुनवाई भी जल्दी संभव है। हिमाचल हाईकोर्ट ने अपने एक निर्णय में कहा था कि भारत की नागरिकता नहीं होने के कारण नेपाली मूल के लोगों के राशन कार्ड नहीं बन सकते हैं।
नेपालियों का लंबे समय तक भारत में रुकना भी उनके राशन कार्ड बनाए जाने की योग्यता नहीं मानी जा सकती है। भारत सरकार का यह स्टैंड है कि राशन कार्ड बनाना उपदान के रूप में साधनों का हस्तांतरण दर्शाता है। यह भारत के लोगों केे साथ ही हो सकता है। अन्य देशों के नागरिकों के साथ नहीं। भारत और नेपाल के बीच एक मैत्री संधि है। जो नागरिक भारत के नागरिक की परिभाषा के तहत आते हैं, वे ही राशन कार्ड लेने के हकदार हैं। तिब्बती शरणार्थियों के साथ उनकी समानता नहीं हो सकती है।
अधिवक्ता ने कहा कि चुनौती इस आधार पर दी गई है कि राशन कार्ड बनाने के लिए भारत का नागरिक होना जरूरी नहीं है। इसके लिए जो हिमाचल में रहा है और जिसकी यहां स्थायी तौर पर रहने इरादा है, उसको राशन कार्ड दिए जाने चाहिए। बहुत सारे नेपाली यहां स्थायी सेवाओं में हैं। एक आधार यह है कि जब तिब्बतियों को राशन कार्ड दिए जाने रहे हैं तो नेपालियों को क्यों नहीं? भारत में तिब्बतियों के शरणार्थी होने पर उन्हें राशन कार्ड की सुविधा मिल रही है, जबकि हाई कोर्ट के इस निर्णय के बाद जिन नेपालियों के राशन कार्ड बने हैं, वे अब खारिज भी हो सकते हैं। हिमाचल में भी सैकड़ों नेपालियों के राशन कार्ड बने हुए हैं।

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