‘लाल सलाम’ के गढ़ को भेदना बड़ी चुनौती

शिमला। छात्र संघ चुनाव में शहर के कॉलेजों में एसएफआई का एक छत्र राज है। ‘लाल सलाम’ के गढ़ में सेंध लगाना एबीवीपी और एनएसयूआई के लिए चुनौती से कम नहीं। हालांकि, इस बार दोनों संगठन पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरने का दावा कर रहे हैं। एसएफआई भी जीत पक्की मानकर चल रही है। पिछले साल के इतिहास पर नजर डालें तो पांच कॉलेजों की बीस में से 15 सीटें एसएफआई ने जीती हैं। एबीवीपी ने पांच सीटें जीतकर लाज बचाई थी। कांग्रेस समर्थित एनएसयूआई खाता नहीं खोल सकी थी। एसएफआई ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 15 सीटें जीती थी। एबीवीपी ने कोटशेरा में एक सीट और संस्कृत कॉलेज में क्लीन स्वीप किया था। संजौली, आरकेएमवी और इवनिंग कॉलेज में एसएफआई का पूरा पैनल जीता था। कोटशेरा कॉलेज में एबीवीपी ने महासचिव पद को एसएफआई से जीत लिया था। इस बार स्थिति सुधारने के लिए एनएसयूआई शहर के कॉलेजों पर फोक्स कर रही है। एबीवीपी भी सीटों का आंकड़ा बढ़ाने के लिए दमखम दिखा रही है। तीनों संगठन सक्रिय हो चुके हैं। एबीवीपी फागली संस्कृत कॉलेज में अपने गढ़ को बचाने की फिराक में है। एसएफआई अपनी स्थिति और मजबूत करना चाहेगी। एनएसयूआई भी खाता खोलने के पूरजोर लगा रही है।

पिछले साल किसने कितनी सीटें जीती
कोटशेरा एसएफआई तीन, एबीवीपी एक, संजौली, आरकेएमवी इवनिंग कॉलेज में चारों सीटें एसएफआई ने कब्जाई थी। संस्कृत कॉलेज फागली में एबीवीपी का पूरा पैनल जीता था। ठियोग कॉलेज में एसएफआई ने एक, एबीवीपी ने तीन, सरस्वती जुब्बल में चारों सीटें एबीवीपी ने जीती थी। डीएवी कोटखाई में अध्यक्ष पर पर एसएफआई और एनएसयूआई के प्रत्याशी संयुक्त विजेता रहे थे। तीन सीटें एसएफआई ने जीती थी। सीमा कॉलेज में एनएसयूआई ने चारों सीटें जीती थी। पीजी कॉलेज रामपुर में एसएफआई ने तीन और एनएसयूआई ने एक सीट जीत थी। नेरवा कॉलेज में चारों सीटें एबीवीपी ने जीती थी। संस्कृत कॉलेज जांगला में एनएसयूआई ने तीन और एबीवीपी ने एक सीट जबकि सुन्नी कॉलेज में चारों सीटों पर एनएसयूआई ने जीत का परचम लहराया था।

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