
उत्तरकाशी। भागीरथी घाटी की कृषि, बागवानी और यात्रा से जुड़ी अर्थव्यवस्था को ध्वस्त करने वाले गंगोत्री हाईवे को सरकार ने जल्दी ही हल्के वाहनों के चलने लायक बनाने का दावा किया है, मगर जिस धीमी गति से उसके लिए काम चल रहा है उससे इस माह भी हाई वे पर गाड़ियों के पहिए घूमने मुश्किल लग रहे हैं।
गंगोत्री हाईवे धरासू, नालूपाणी, नाकुरी, बंदरकोट तथा बडेथी में आए दिन भागीरथी के कटाव से बंद हो रहा है। गंगोरी, नेताला और हिना में भूस्खलन हो रहा है। नलूणा, औंगी, बिशनपुर में सड़क काटकर भागीरथी भारी चट्टानों से सटकर बह रही है। लाटा से भटवाड़ी चडेती, क्यार्क गांव तक सात किमी हाईवे के कई हिस्से 200 मीटर नीचे भागीरथी तक पहुंच गए हैं। बार्सु बैंड तथा गगनानी में 200 मीटर से ज्यादा सड़क सीधी भागीरथी में समाई हुई है। आगे गंगोत्री की ओर सोनगाड़, डबराणी, गोलमू उडार तथा सुक्की में बीआरओ ने अपनी मशीनें निकालने के लिए सड़क तैयार की लेकिन वह यात्रा शुरू करने लायक स्थिति में नहीं है। जमीनी सच्चाई यह है कि अभी तक उत्तरकाशी से भटवाड़ी के बीच सुरक्षित आवाजाही के लिए पैदल मार्ग तक नहीं बन पाया है। बीआरओ के पास संसाधनों का अभाव है। यातायात बहाली के लिए ठोस प्रयास न होने से पर्यटकों में गलत संदेश जा रहा है।
तो भी नुकसान की भरपाई मुश्किल
उत्तरकाशी। इन दिनो मनेरी, भटवाडी, हर्षिल क्षेत्र में करीब पांच हजार मीट्रिक टन सेब, छह से आठ सौ मीट्रिक टन आलू तथा पैंतालीस मैट्रिक टन सब्जी का उत्पादन होता है। सरकार समर्थन मूल्य देकर सेब और आलू खरदने की बात कह रही है। इससे काश्तकारों को फसल तैयार करने में लगी लागत भी निकलनी मुश्किल है।
हाईवे को खोलने में लगेगा समय
उत्तरकाशी। बीआरओ के कमांडर चंद्रशेखर स्वीकार करते हैं कि 15 अगस्त तक गंगोत्री हाईवे को यातायात योग्य तैयार नहीं किया जा सकता है। नेताला-हिना के बीच हाईवे का 300 मीटर हिस्सा दलदली हो चुका है। यहां बरसात के बाद ही काम शुरू हो सकेगा। औंगी, विशनपुर, लालढांग में चट्टानें हिस्से को काटकर नई सड़क तैयार करने में समय लगेगा। मौसम में बिगड़े हालत यातायात बहाल में बड़ी बाधा है।
