
रामपुर बुशहर। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट के तहत प्रदेश के सभी जिलों में अपीलेट ट्रिब्यूनल खोलने की मंजूरी मिल गई है। इसके लिए हर जिला एवं सत्र न्यायालय को अपीलेट ट्रिब्यूनल का दर्जा दिया जा रहा है। इसके बाद प्रदेश के व्यापारी एडीएम के फैसले के खिलाफ जिला न्यायालय में अपील कर पाएंगे। इससे पहले यह अपील विभाग के निदेशक के पास होती थी। लेकिन अब सभी जिलों में ट्रिब्यूनल बनाया जा रहा है। यह ट्रिब्यूनल फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट की धारा 70 के तहत बनाए जा रहे हैं। इसके लिए प्रदेश सरकार की ओर से अधिसूचना जारी कर दी गई है।
प्रदेश में पांच अगस्त 2011 को फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट लागू किया गया। इस एक्ट के तहत विभिन्न मामलों के तहत एक लाख से लेकर 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। जबकि विशेष मामलों में जिसमें खाद्य वस्तुओं के सेवन से अगर किसी की मौत हो जाए या फिर गंभीर रोग की चपेट में आ जाए में उम्रकैद की सजा का प्रावधान रखा गया है। इस एक्ट के तहत स्वास्थ्य विभाग की जांच के बाद सैंपल फेल होने पर आरोपी कंपनी और व्यापारियों के खिलाफ मामले एडीएम के पास चलाए जाते हैं। इसके बाद अपील के लिए प्रदेश में अलग से ट्रिब्यूनल कोर्ट की स्थापना होनी थी। इसके लिए अब प्रदेश सरकार ने अधिसूचना जारी कर दी है। ट्रिब्यूनल कोर्ट बनने से प्रदेश में कारोबार कर रहे करीब चार लाख व्यापारियों को राहत मिली है।
निदेशक फूड एंड सेफ्टी स्टैंडर्ड हंसराज शर्मा का कहना है कि प्रदेश गृह विभाग में फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट के तहत अपीलेट कोर्ट के लिए अधिसूचना जारी कर दी गई है। इसके तहत हर जिला एवं कोर्ट को अपीलेट ट्रिब्यूनल का दर्जा दिया गया है।
