
पजिटिलानी गांव में प्राथमिक स्कूल, इंटर कालेज, मिनी स्टेडियम और अस्पताल है। सड़कों की स्थिति भी ठीक है। पीने के पानी की भी समस्या नहीं है। साहिया से 19 किमी दूर स्थित इस गांव में कभी 55 परिवार रहते थे लेकिन इनमें से इस साल अब तक 11 परिवार पलायन कर गये हैं।
गांव में हो रहा भूस्खलन
कई दूसरी जगह बसने की सोच रहे हैं। गांव में तमाम सुविधाओं के बावजूद इन परिवारों की अपनी जड़ों और माटी से दूर जाने की वजह है गांव में हो रहा भूस्खलन। दरकते पहाड़ लोगों को अपना घर-आंगन छोड़ने को मजबूर कर रहे हैं।
पजिटिलानी गांव में ज्यादातर मकानों के नीचे कटाव हो रहा है। कइयों के खेत तबाह हो गए हैं। कई लोगों को अपनी दुकानें छोड़नी पड़ी हैं। पिछले तीन वर्षों से गांव के नीचे की जमीन खिसक रही है। इस साल की आपदा के बाद गांव रहने लायक नहीं रह गया है।
कई परिवार गांव छोड़ छानियों और दूसरे गांवों में शरण ले चुके हैं। जीतराम शर्मा, कुंदन सिंह तोमर और सावन सिंह तोमर का कहना है कि यदि प्रशासन ने विस्थापन के लिए जल्द ही कोई कदम नहीं उठाए तो उनके समक्ष रहने की समस्या खड़ी हो जाएगी।
मजबूरी में गांव छोड़ना पड़ा। दो मंजिला मकान के भूस्खलन में तबाह होने के बाद सिर से छत चली गई। उसके बाद रोजगार का एकमात्र जरिया रही दुकान में दरारें पड़ गईं। इसके बाद गांव में रहने की कोई वजह नहीं बची। भूस्खलन ने घर और रोजगार तो छीना ही अपनी माटी और जड़ों को भी छीन लिया।
– पजिटिलानी गांव छोड़कर विकासनगर में बसे सीताराम शर्मा
राजस्व उपनिरीक्षक को स्थिति पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं। पुनर्वास के लिए ग्रामीणों की सूची तैयार कर शासन को भेजी है। ट्रीटमेंट कर गांव को बचाने के प्रयास किए जाएंगे।
