
नाचनी (पिथौरागढ़)। ला, झेकला और रूमीडोला गांव की तबाही को चार साल पूरे हो गए, लेकिन इन गांवों का विस्थापन अब तक नहीं हो सका। प्रशासन का कहना है कि इन गांवों सहित कुल 56 गांवों के विस्थापन का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। ऐसे में अब फिक्र इस बात की है कि जून में आई जबर्दस्त अतिवृष्टि से मची तबाही का विस्थापन कैसे होगा?
सात अगस्त 2009 की रात दाफा ग्राम पंचायत के ला, झेकला और बेड़ूमहर ग्राम पंचायत के रूमीडोला गांव के लोगों का खौफनाक मंजर से सामना हुआ। हादसे में इन गांवों के 43 लोग मौत के मुंह में समा गए। बस जीवित बचे दो परिवार के लोग तराई में बस गए।
झेकला के 26 मकान अब भी खतरे की जद में है। चचना तोक के छह परिवार टेंटों में रह रहे हैं। आपदा प्रभावित मोहन राम, लक्ष्मण सिंह, इंद्र सिंह, कमल राणा आदि का कहना है कि कब तक जिंदगी यूं ही घिसटती रहेगी।
