
देहरादून। टाइगर रिजर्व बनाने के केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के ग्रीन सिग्नल के बाद राजाजी राष्ट्रीय पार्क के आसपास के क्षेत्रों में निर्माण की बाढ़ आ गई है।
रामगढ़ से लेकर हरिद्वार रेंज तक में बड़े पैमाने पर रिजार्ट, होटल, बारातघर और फार्म हाउस का निर्माण कराया जा रहा है, लेकिन पार्क प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। इसको लेकर किसी स्तर पर निर्माण को रोकने की कोशिश नहीं की जा रही है, जिससे भविष्य में वन्यजीवों के लिए खतरा बढ़ सकता है।
केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने कार्बेट के बाद प्रदेश में राजाजी को दूसरा टाइगर रिजर्व बनाने का ग्रीन सिग्नल जून के तीसरे सप्ताह में दिया था। इसके बाद रिजार्ट, होटल बनाने वाले सक्रिय हो गए। पिछले लगभग डेढ़ माह से पार्क के आसपास के क्षेत्रों में निर्माण की गतिविधियां तेज हो गई है।
क्योंकि, प्रदेश सरकार की ओर से टाइगर रिजर्व का नोटिफिकेशन होते ही स्थितियां बदल जाएंगी। ऐसे में होटल आदि बनाने वालों की ओर से तेजी दिखाई जा रही है। अगर यही स्थिति रही तो राजाजी की भी तसवीर कार्बेट टाइगर रिजर्व जैसी ही हो जाएगी, जिसका खामियाजा आने वाले दिनों में पार्क के वन्यजीवों को भुगतना पड़ेगा।
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किस रेंज में हो रहा निर्माण
हरिद्वार, मोतीचूर, गौहरी, रामगढ़
क्या होगा नुकसान
– वन्यजीवों की शांति भंग होगी
– शिकार की घटनाएं बढ़ सकती हैं
– निर्माण से मूवमेंट प्रभावित होगा
सरकार को तत्काल प्रभाव से राजाजी राष्ट्रीय पार्क के आसपास ईको सेंसिटिव जोन घोषित करना चाहिए, जिससे निर्माणों पर अंकुश लगाया जा सके। इसके लिए जंगलात महकमे को पहल करना चाहिए। – एएस नेगी, पूर्व मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक
किसी भी एक्ट में पार्क के आसपास के क्षेत्रों में निर्माणों को रोकने का प्रावधान नहीं है। राजस्व विभाग की ओर से ही इस दिशा में कारगर कदम उठाया जा सकता है। शासन अगर डीएम को निर्देश दे, तभी कुछ संभव हो सकता है। — एसएस शर्मा, प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव
