पहाड़ पर बंगाली सीजन चौपट होने की आशंका

चंपावत। पहाड़ में बंगाली पर्यटन सीजन के भी चौपट होने की आशंका है। आपदा के कारण इस बार ग्रीष्मकालीन पर्यटन सीजन पूरी तरह चौपट होकर रह गया था। पर्यटन व्यवसाय से जुड़ी एजेंसियों की चिंता लगातार बढ़ने लगी है। पहाड़ों में बारिश का सीजन समाप्त होते ही अक्तूबर प्रथम सप्ताह से बंगाली पर्यटन सीजन शुरू हो जाता है। इसकी बुकिंग अगस्त से होने लग जाती थी।
कुमाऊं मंडल विकास निगम के पर्यटक आवासगृहों में इस बार 15 जून से ही सन्नाटा पसर गया था। पिछले वर्ष 15 जुलाई तक ग्रीष्मकालीन पर्यटन सीजन चला था। ठीक यही स्थिति बंगाली सीजन में भी आने वाली है। बंगाली पर्यटक टनकपुर से चंपावत, लोहाघाट, पिथौरागढ़ होते हुए मुनस्यारी तक सफर करता है। ऐसे में चंपावत तथा लोहाघाट में भी बंगाली पर्यटकों की चहल पहल देखने को मिल जाती थी। जिला पर्यटन अधिकारी एसएस यादव ने बताया कि ग्रीष्मकालीन पर्यटन पूरी तरह चौपट हो गया था। अब बंगाली सीजन पर भी इसका असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि आपदा का खौफ देशभर के लोगों में बना हुआ है। उन्होंने कहा कि स्थिति सामान्य होने में लंबा समय लग सकता है।
कुमाऊं मंडल विकास निगम के साहसिक पर्यटन प्रबंधक दिनेश गुरुरानी ने बताया कि जून में बारिश होते ही कई बुकिंग कैंसिल करनी पड़ी थी। इसके अलावा राफ्टिंग के लिए प्रस्तावित कई प्रोग्राम स्थगित करने पड़े। उन्होंने कहा कि अब तक बंगाली सीजन के लिए कोई एडवांस बुकिंग नहीं आई है। अक्तूबर से राफ्टिंग कराने के प्रयास को भी झटका लग सकता है। वह कहते हैं कि बंगाली पर्यटन सीजन का असर शेष कुमाऊं के साथ साथ पिथौरागढ़ और चंपावत जिले में भी व्यापक रूप से पड़ेगा।
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सामान्य यात्रियों की संख्या भी कम हुई
चंपावत। चंपावत जिले में पर्यटकों की संख्या वैसे ही अंगुलियों में गिनने लायक रहती है लेकिन इस बार इस संख्या में और गिरावट आने वाली है। पर्यटकों की आवाजाही से यहां के होटल व्यवसायियों को लाभ मिलता था। साथ ही वाहन चालकों की भी कमाई हो जाती थी। व्यवसायियों का कहना है कि पहाड़ों में पर्यटक ही नहीं सामान्य यात्रियों की संख्या में भी कमी आई है।

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