
ऊना। हिमाचल प्रदेश पदोन्नत स्कूल प्राध्यापक संघ जिला ऊना इकाई का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से पदोन्नत प्राध्यापकों को मुख्याध्यापकों के रिक्त पदों पर पदोन्नत किए जाने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। संघ की राज्य इकाई ने उच्च न्यायालय के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने 17 जुलाई को हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए अपना फैसला दिया। उच्च न्यायालय ने केस संख्या सीडब्ल्यूपी 814/2012 पर फैसला सुनाया था। संघ के जिलाध्यक्ष कुलदीप कुमार ने कहा कि इस फैसले से हिमाचल प्रदेश के करीब 7000 पदोन्नत प्राध्यापकों को फायदा मिलेगा। उन्होंने कहा कि फैसला पलट जाने पर संघ ने खुशी व्यक्त की है। लंबी लड़ाई लड़ने के बाद अपने पक्ष में आए फैसले पर पदोन्नत प्राध्यापकों के चेहरों पर खुशी साफ झलक रही है। मुख्याध्यापक बनने के बाद पदोन्नत प्राध्यापकों को स्कूल प्राचार्य के पद पर भी पदोन्नत किया जा सकेगा। संघ ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि वर्षों से अपनी पदोन्नति की राह देख रहे प्राध्यापकों के पक्ष में आए फैसले को अविलंब क्रियान्वित करने का प्रावधान किया जाए। ऊना इकाई ने इसके लिए राज्य कार्यकारिणी के सदस्यों का भी विशेष आभार प्रकट किया है। संघ के जिलाध्यक्ष कुलदीप कुमार, महासचिव मोहन लाल शर्मा, वित्त सचिव विवेक दत्ता, संदीप शर्मा, कपिल चावला, हरीश साहनी, राजेश कुमार शर्मा, जीवन सांख्यान, अनिल चौधरी, संजीव कुमार, राजेश धीमान, दलवीर ठाकुर, बलदेव शर्मा, सुरेंद्र सिंह व अशोक बैंस ने इस पर सभी पदोन्नत प्राध्यापकों को बधाई दी है। इन पदोन्नत प्राध्यापकों ने कहा कि राज्य सरकार को अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले को क्रियान्वित करने में देर नहीं करनी चाहिए।
