गुठली खरीद जंगल में लगा रहा जंगलात

हल्द्वानी। ‘आम के आम गुठली के दाम’ यह मुहावरा अधिकांश लोगों ने सुना होगा। इस मुहावरे को जंगलात ने हू-ब-हू ही लागू कर दिया है। बंदरों के उत्पात को कम करने के लिए आम की गुठली खरीद कर जंगल में लगाना शुरू किया है। फारेस्ट डिपार्टमेंट मैंगो के जादू से बंदरों को काबू करने की योजना बनाई है। इसी तरह हाथियों के लिए भी खास इंतजाम किए जा रहे हैं।
बंदरों और हाथियों के उत्पात से लोग परेशान हैं। हाथियों को रोकने के लिए सोलर फैसिंग, खाई खोदना, दीवार बनाने जैसे तमाम फार्मूले आजमाए गए, लेकिन खास परिणाम नहीं निकला। कॉरिडोर बंद होने के कारण एक जगह फंस रहे हाथियों को खेतों में लगी फसल दिखाई देती है, तो वह झुंड के साथ घुसकर नुकसान पहुंचाते हैं। इसी तरह बंदर भी फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इनके लिए बाड़े आदि बनाने की योजना भी चल रही है। वहीं, जंगलात ने बंदरों को जंगल में ही रोकने की योजना बनाई है। इसके लिए आम जैसे फलों को माध्यम बनाया जा रहा है। महकमे ने खास इलाकों में आम का रोपण शुरू किया है, जिससे बंदरों को खाने की तलाश में बाहर न जाना पड़े। इसके लिए बाकायदा महकमा गुठली भी खरीद रहा है, जिससे जंगल में आसानी से पौधे बनाए जा सकते हैं।
तराई केंद्रीय वन प्रभाग डीएफओ एसपी सिंह कहते हैं, बहुत ज्यादा प्रयास किए बगैर ही गुठली से पौधे तैयार हो सकते हैं, हम गुठली को खरीद कर जंगल में लगा रहे हैं। आम के अलावा जामुन, फालसा आदि प्रजातियों को भी लगाया जा रहा है। इसके अलावा हाथियों वाले इलाके उनकी मनपसंद घास नेपियर को भी वृहद स्तर पर रोपण किया जा रहा है, अगर जंगल मिश्रित प्रजातियों से भरपूर होगा, तो वन्यजीव खुद ही आबादी की तरफ रुख नहीं करेंगे।

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