बिना कर्ज के कर्जदार बनी चार बहनें

हल्द्वानी। कमल देवी, विरमा, रामो और प्रेमा देवी। गौला गेट की इन चार विधवा बहनों को बहुउद्देशीय वित्त विकास निगम ने नोटिस भेजा वसूली का। वसूली लोन की है जो इन्होंने लिया ही नहीं। ऊपर से अब लौटाने का आदेश मिला है वो भी ब्याज सहित। खलबली मची है चारों में और न्याय के लिए मंगलवार को ये नगर निगम ऑफिस आ पहुंची। महापौर से बोली साहब एक स्वच्छक आया था सात साल पहले। अंगूठे के निशान ले गया। हमने तो पैसा देखा तक नहीं। फिर बिना कर्ज के कर्जदार क्यों?
धोखाधड़ी की यह कहानी सात साल पहले तब लिखी गई, जब वर्ष 2005-06 में बहुउद्देशीय वित्त विकास निगम ने स्वत: रोजगार योजना के तहत बेरोजगारों को लोन बांटा। चारों महिलाएं निजी सफाई कर्मी हैं। इनमें से कमल देवी, विरमा और रामो के नाम पर 4500-4500 रुपये के हिसाब से लोन लिया गया है। जबकि प्रेमा इस धोखेबाजी में तीन हजार रुपये की ऋणी बनी है। निगम के नोटिस में कमल, विरमा, रामो को ब्याज समेत कुल 6317 प्रति ऋणी के हिसाब से चुकाने के आदेश हुए हैं। साथ में चेतावनी भी कि यदि भुगतान नहीं किया गया तो आरसी जारी की जाएगी।
चारों बहनों ने मेयर डा. जोगेंद्र सिंह रौतेला को बताया कि नगर पालिका के एक स्वच्छक ने सात साल पहले कथित तौर पर खुद को उनका शुभचिंतक बताया और लोन के बहाने कागजों में अंगूठे लगवाए, लेकिन उन्हें इस योजना से एक रुपया नहीं मिला। डा. रौतेला ने मामले में उचित कार्रवाई का भरोसा दिया है। इसी दौरान पीड़ित महिलाओं ने आरटीआई कार्यकर्ता गुरविंदर सिंह चड्ढा, समाजसेवी हेमंत गौनिया और राजेंद्र सिंह के माध्यम से एसडीएम हरवीर सिंह के साथ कोतवाली में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। समाजसेवियों ने बताया कि संबंधित मोहल्ले में एक नहीं बल्कि 20 लोगों से धोखाधड़ी की बात सामने आ रही है। इसकी जांच कराई जानी चाहिए।

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