मढेहड, दियोल हर साल झेलते हैं तबाही

मढेहड (बैजनाथ)। ऊपरी क्षेत्र के लोगों के लिए बरसात मुसीबतें लेकर आई है। उपमंडल के मढेहड और दियोल गांव के लोग हर वर्ष बरसात में किसी न किसी त्रासदी का शिकार होते रहे हैं। तीन सितंबर 2009 को गांव के इसी नाले ने भारी तबाही मचाई थी। एक दर्जन पशु और आधा दर्जन मकान तेज बहाव में बह गए थे। सोमवार को भी इस नाले का रौद्र रूप देखकर हर किसी की रूह कांप उठी। 2010 में संसाल के ही मतरुहं गांव में जमीन फटने से पूरे गांव के घरों में दरारें पड़ गई थीं। एक ही परिवार के चार लोग जान से हाथ धो बैठे थे। 2011 में भी मतरुंह गांव में घरों को नुकसान हुआ था। पंचायत प्रधान राधा देवी का कहना है कि लोग 2009 की त्रासदी से उबरने की कोशिश कर रहे थे कि अब यह आपदा घट गई। यही हाल दियोल गांव का रहा है। कई वर्षों में करीब चार मर्तबा गांव के लोगों को नुकसान झेलना पड़ रहा है। पूर्व बीडीसी मेंबर शीतल प्रसाद और पूर्व पंचायत प्रधान भीखम कपूर, संसाल पंचायत के प्रधान रघुवीर सिंह आदि का कहना है कि रोदर नाले के ऊपर जंगल होने के कारण पत्तियां और घास आदि नाले में फंस जाते हैं। ऐसे में झील तैयार हो जाती है। इसके चलते बरसात में यहां बादल फटने जैसी आपदा घट जाती है। उन्होने सरकार से मढेहड गांव से ऊपर के दो किलोमीटर के नाले के हिस्से में क्रेट लगाने की मांग की है।

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