समडर के ग्रामीणों ने पहली बार देखा डाक्टर

बागेश्वर। लगभग एक हजार की आबादी वाले उच्च हिमालय के समडर और बोर बलड़ा क्षेत्र में पहली बार किसी डाक्टर के कदम पड़े। वह भी तब, जबकि आपदा के कारण यहां के रास्तों में पग-पग पर खतरा बना हुआ है और यहां आवागमन बंद है। कपकोट के डा. मनीष पंत वहां पहुंचने वाले पहले चिकित्सक हैं।
बोर बलड़ा और समडर जैसे इलाकों में सामान्य दिनों में भी लंबी पद यात्राएं करनी पड़ती हैं। इस बीच आपदा से पैदल पुल बह जाने के कारण यह इलाका कटा हुआ है। लोगाें की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को देखने के लिए प्रशासन ने निर्देश दिए तो कपकोट स्वास्थ्य केंद्र के डा. मनीष पंत और फार्मेसिस्ट विपिन चंद्र पांडे ही नहीं 57 साल के वार्ड ब्वाय भवान सिंह भी वहां जाने को राजी हो गए। यह लोग 26 जून को रवाना हुए। धाकुड़ी, खरकिया, उमुला, बदियाकोट होते हुए वह 30 को समडर पहुंचे। इपने क्षेत्र में किसी डाक्टर को ग्रामीणों ने पहली बार देखा। यहां एक दिन कैंप करने के बाद टीम लौट आई। विभिन्न स्थानों पर लगे शिविरों में छह सौ से अधिक लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया, आवश्यकतानुसार दवाइयां दी गईं। डा. पंत ने बताया कि यात्रा काफी कठिन और जोखिम भरी थी। खासकर जोंकों ने परेशान किया। लेकिन इस दूरस्थ इलाके के लोगों की तकलीफों को महसूस करने का अवसर मिला।

Related posts