रामेश्वर में पूजन से मिलती है अलौकिक अनुभूति

पिथौरागढ़। भगवान श्रीराम द्वारा स्थापित रामेश्वर के शिव मंदिर का खास स्थान है। महर्षि वेद व्यास द्वारा रचित स्कंद पुराण के मानसखंड में रामेश्वर सहित कई धर्मस्थलों का विस्तार से वर्णन है। यहां पूजन करने से अलौकिक अनुभूति के साथ ही पुण्य की प्राप्ति होती है।
मानसरोवर झील से निकली सरयू और परशुराम द्वारा खोजी गई रामगंगा के संगम पनार में स्थित शिव मंदिर को भगवान राम ने स्वर्गारोहण के समय स्वयं स्थापित किया था। स्कंदपुराण के मानसखंड में इसका उल्लेख है।-
तस्माद्दशगुणं पुण्यं पूज्य रामेश्वरं स्मृतम
वैद्यनाथाच्छतगुणं सेतुबंधन्धात्ततैव च
प्राप्यते मुनिशार्दूल पूज्य रामेश्वरं हरम
येन रामेश्वरो देव: सरयूसंगमे शुभे
कहा गया है कि काशी विश्वनाथ के पूजन की अपेक्षा दस गुना, वैद्यनाथ और सेतुबंध रामेश्वर की अपेक्षा सौ गुना अधिक फल रामेश्वर पूजन से मिलता है।
पुराण में रामेश्वर नाम के 95वें अध्याय में भगवान राम के स्वर्गारोहण के बाद अयोध्या वासियों के रामेश्वर आने का वृतांत है। रामेश्वर में चतुर्दशी के दिन सरयू स्नान, शिव पूजन, पितृ तर्पण के श्रेष्ठ फल बताए गए हैं। जगतगुरु शंकराचार्य जी महाराज द्वारा आठवीं सदी में खोजी गई पाताल भुवनेश्वर गुफा का स्कंद पुराण में उल्लेख है।
आवासं तासु देवस्य विद्यते मुनिसत्तमा
स्मर: स्मेरु:स्वधामा च ख्यायन्ते मुनिसत्तमा
न यान्ति तासु पापिष्ठा गुरुद्रोहरतास्तथा
न गतिर्मानुषाणां हि कलौ तासु तपोधना
अर्थात सत्यवादी ऋषियों द्वारा वर्णित गुहाओं में ही देवेश का वास है। स्मर, स्मेरु और स्वधामा नाम की गुफाएं भी वहां (पाताल भुवनेश्वर) विद्यमान हैं। उनमें पापिष्ठ नहीं जा सकते। कलयुग में सामान्य जन का वहां प्रवेश दुष्कर है।

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