
धांधली और कृषि विभाग एक दूसरे के पर्याय से बन गए हैं। ढेंचा बीज, ऊधमसिंह नगर में भूमि संरक्षण कार्यों में घपले के बाद अब विभागीय आडिट कार्य में भी फर्जीवाड़ा सामने आ रहा है। बंजर भूमि विकास और हरियाली योजनाओं के आडिट के लिए विभाग ने कृषि वित्त निगम से आडिट कराया।
लेकिन, इस काम के लिए 60 लाख रुपये लेने के बावजूद निगम ने कृषि निदेशालय को बिना सक्षम अधिकारी के हस्ताक्षर की आडिट रिपोर्ट भेज दी। ऐसे में इस रिपोर्ट पर सवाल खड़े होने लगे हैं। मामला संज्ञान में आने के बाद कृषि मंत्री हरक सिंह रावत ने जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई का निर्देश दिया है। उन्होंने मामले में प्रमुख सचिव से भी आख्या मांगी है।
खुली थी 61 लाख की अनियमितता
कृषि वित्त निगम ने वर्ष 2004-05 में केंद्र सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग की ओर से संचालित योजनाओं के तहत किए गए कार्यों का आडिट किया था। तत्कालीन कृषि निदेशक मदनलाल इसके लिए नोडल अधिकारी बनाए गए।
आडिट में निगम ने 61,01,306 रुपये की अनियमितता सामने आने के बाद विभाग ने कई अधिकारियों पर चार्जशीट भी दाखिल की। लेकिन एक शिकायती पत्र पर विभाग के वित्त नियंत्रक शैलेंद्र शंकर सिंह की अध्यक्षता में गठित तीन अधिकारियों उप कृषि निदेशक तकनीकी संप्रेक्षण एमएस तोमर और संयुक्त निदेशक कृषि नियोजन केसी पाठक ने 17 जून 2013 को आडिट रिपोर्ट की जांच रिपोर्ट निदेशालय को दी। इसमें बिंदु संख्या नौ पर बताया गया है कि ऑडिट रिपोर्ट बिना हस्ताक्षर के प्राप्त हुई।
आडिट किया, लेकिन नहीं मांगा बकाया
कुछ क्षेत्रों में ऑडिट के लिए कृषि वित्त निगम ने साढ़े छह लाख का बिल दिया। लेकिन उसे साढ़े चार लाख रुपये ही दिए गए। रिपोर्ट के मुताबिक निगम ने बकाया राशि की मांग नहीं की। दूसरी ओर, भूमि संरक्षण अधिकारी कालसी ने वित्त निगम को तय राशि एक लाख 35 हजार के बजाय साढ़े चार लाख का भुगतान कर दिया। इसके बाद जिन क्षेत्रों में काम नहीं हुआ था, वहां भी काम दिखाया गया।
