खंडहर बनकर रह गया लोनिवि का बारूद घर

रानीखेत। सरकारी संपत्ति को लेकर महकमा कितना संजीदा है यह रानीखेत-हल्द्वानी मार्ग पर पन्याली के ऊपर वीरान जंगल में स्थापित लोनिवि के बारूद (कारतूस) घर से लगाया जा सकता है। देखरेख के अभाव में खंडहर में तब्दील हो रहा यह भवन अब अराजक तत्वों के लिए अय्याशी का अड्डा बनकर रह गया है। बताया जाता है कि मानकों के अनुसार भवन का निर्माण नहीं होने के कारण इसका उपयोग नहीं हो सका।
पूर्व में मोटर मार्ग निर्माण में चट्टानों को तोड़ने के लिए बारूद का इस्तेमाल किया जाता था। कारतूसों को रखने के लिए लोनिवि आबादी से दूर बारूद घरों का निर्माण करती थी। रानीखेत में भी शहर से आठ किमी दूर रानीखेत-हल्द्वानी मार्ग पर पन्याली के ऊपर झूलादेवी के जंगल में 1979-80 के बीच लोनिवि ने बारूद घर का निर्माण किया। लेकिन इसका इस्तेमाल आज तक नहीं हुआ। क्षेत्र के पूर्व विधायक और तत्कालीन निर्माणाचार्य संघ के अध्यक्ष पूरन माहरा बताते हैं कि बारूद घर को काफी हिफाजत से रखा जाता था, इसमें दोहरे ताले वाले दरवाजे होते थे, साथ ही यहां चौकीदार की भी नियुक्ति की जाती थी। नियमित निरीक्षण भी किया जाता था। लोनिवि ने भवन तो बना दिया गया, लेकिन यह भवन धुर जंगल में होने के कारण इसकी जिम्मेदारी लेने से हमेशा बचने की कोशिश की जाती रही। बारूद घर तक मार्ग बनाने के लिए उन्होंने भी काफी प्रयास किए। आज देखरेख के अभाव में संपत्ति बर्बाद हो रही है। उक्रांद के वरिष्ठ नेता शिव राज सिंह माहरा ने कहा कि लोनिवि की हीलाहवाली के कारण झूला देवी के जंगल में स्थापित बारूद घर अराजक तत्वों का अड्डा बना हुआ है। देखरेख के अभाव में यह भवन खंडहर बन रहा है। मानकों के अनुसार भवन नहीं बनने के कारण इसका इस्तेमाल नहीं हो सका।

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