
सोलन। जलजनित रोगों बरसात के मौसम में पांव पसारना शुरू कर दिया है। अस्पताल के आंकड़ों के मुताबिक रोजाना उल्टी दस्त के औसतन 15, डायरिया के 30 से 40 केस जोनल अस्पताल में पहुंच रहे हैं। इसमें बच्चों की संख्या सबसे अधिक बताई जा रही है। गनीमत है कि यह मामले एक ही इलाके से नहीं है। उधर अस्पताल प्रशासन का दावा है कि इस मौसम में जलजनित रोगों डायरिया, पीलिया जैसी बीमारी के लक्षण पाए जाना आम बात है। प्रबंधन पूरी स्थिति से निपटने के लिए चौकस है। बरसात के मौसम में विभिन्न विभागों के सहयोग से लोगों को जलजनित रोगों से बचने के उपायों के बारे में जागरूक किया जा रहा है। जुलाई के अंतिम दिनों में जलजनित रोगों में बीस फीसदी इजाफा हुआ है। इसकी पुष्टि जिला चिकित्सा अधिकारी डा. यशवंत वर्मा ने की है।
जलजनित रोगों के फैलने का मुख्य कारण दूषित जल पीना है। बरसात के मौसम में बारिश में बाहर की गंदगी पेयजल स्रोतों में मिल जाती है तथा लोग जैसे ही दूषित जल को पीते हैं वह बीमार पड़ जाते हैं। कुछ लोग बरसात में अपने शौचालयों के पाइपों को पानी में खोल देते हैं तथा वह गंदगी पानी में घुल कर रोगों को बढ़ावा देती है।
जलजनित रोगों से बचने के लिए लोगों को पानी उबालकर पीना चाहिए। 20 लीटर पानी में प्रतिदिन एक क्लोरिन की गोली डालनी चाहिए। बावड़ियों में प्रतिदिन ब्लीचिंग पाउडर डालना चाहिए। सड़े हुए फल, बासी खाना आदि नहीं खाना चाहिए।
विभाग ने सैंपल भरने किए शुरू
जिला स्वास्थ्य अधिकारी डा. उदित कुमार ने पूरे जिला में पानी के सैंपल भरने के आदेश दे दिए हैं। उन्होंने बताया कि जिला के प्रत्येक ब्लाक से दस-दस सैंपल लेकर लैब में जांच के लिए भेजे जाएंगे। इससे जिन क्षेत्रों में पानी की रिपोर्ट खराब आएगी, वहां पर आवश्यक दवाइयां बांटी जाएगी। सैंपल भरने के लिए प्रत्येक प्राइमरी स्वास्थ्य केंद्र में एक टीम का गठन किया गया है।
