ग्रामीणों का पानी नहीं गटक सकेंगे प्रोजेक्ट

शिमला। हिमाचल की नदियों पर लगे छोटे-बड़े सभी बिजली प्रोजेक्ट अब स्थानीय लोगों और ग्रामीणों के हिस्से का पानी इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। अनिवार्य तौर पर उन्हें आनलाइन दिखाना होगा कि पंद्रह फीसदी पानी खेती, सिंचाई और पेयजल स्रोतों के लिए छोड़ा है। बिजली प्रोजेक्टों को इसका कंप्यूटर पर डाटा डाल कर आम जनता के लिए सूचना मुहैया करवाना अनिवार्य होगा। पहले की तरह प्रोजेक्ट संचालक कंपनी के दावे पर राज्य प्रदूषण बोर्ड और प्रदेश सरकार विश्वास नहीं करेगी। हिमाचल में ऊर्जा नीति के तहत 15 फीसदी पानी छोड़ना सभी प्रोजेक्टों के लिए अनिवार्य है, लेकिन इसकी निगरानी के लिए कोई तकनीकी व्यवस्था न होने के कारण लोगों को उनके हक का पूरा पानी नहीं मिला पाता था।
हिमाचल के हक को दिलाने के लिए राज्य प्रदूषण बोर्ड ने भविष्य में प्रोजेक्ट स्थल पर पानी के बहाव के डाटा के मुताबिक, 15 फीसदी पानी छोड़ने की चेकिंग की व्यवस्था की है। इसके तहत स्थल और पानी छोड़ने के स्थल पर यंत्र लगेंगे। इससे साफ हो जाएगा कि बिजली प्रोजेक्ट संचालक कंपनी ने कितना पानी स्थानीय लोगों के लिए छोड़ा है। इसका डाटा रोजाना ही बिजली निर्माण से जुड़ी कंपनियों को रोजाना अपडेट करना होगा। इसके साथ ही इसे आम लोग देख सकें, इसके लिए अपनी साइट पर भी इसकी व्यवस्था करना अनिवार्य होगी। इसमें कभी भी छोड़ा गया पानी कम पाया जाता है तो प्रदूषण बोर्ड की ओर से नोटिस जारी किया जाएगा। इस मामले में यदि प्रोजेक्ट संचालक कंपनी दोषी पाई जाती है तो उन पर जुर्माने लगाने की व्यवस्था भी होगी।
हिमाचल प्रदेश प्रदूषण बोर्ड के सदस्य सचिव विनीत कुमार ने माना कि हर प्रोजेक्ट के पानी छोड़ने के आंकड़े को आधुनिक तरीके से मापा जाएगा। इसकी आन लाइन जानकारी रोजाना अपडेट करना भी अनिवार्य किया जाना प्रस्तावित है।

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