
भीमताल। सिमायल रैक्वाल गांव में पहाड़ी काटकर अवैध खनन करने वालों के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। राजस्व पुलिस की ढिलाई के चलते माफिया खुलेआम घूम रहे हैं, जबकि प्रशासनिक अफसर अवैध खनन की जानकारी मिलने पर कार्रवाई करने की बात कह रहे हैं।
शुक्रवार को अमर उजाला ने सिमायल गांव में दूसरे केदारनाथ की तैयारी शीर्षक के साथ सिमायल रैक्वाल गांव में हो रहे अवैध खनन की खबर को प्रमुखता से छापा था। इसके बाद राजस्व विभाग के अधिकारियों से लेकर खनन माफिया में हड़कंप मच गया। खनन माफिया ने मौके से मजदूर और जेसीबी हटा दी है। शनिवार को दूसरे दिन भी मौके पर पत्थर तोड़ने के लिए न तो मजदूर आए और न ही कोई मशीन पहुंची। बीते दिवस डीएम अरविंद सिंह हयांकी ने एसडीएम को टीम गठित कर अवैध खनन में लिप्त लोगों की धरपकड़ के निर्देश दिए थे। डीएम के निर्देश के बावजूद खनन माफिया की धरपकड़ तो दूर राजस्व महकमा उनकी पहचान तक नहीं कर सका है। एसडीएम चंद्र सिंह मर्तोलिया का कहना है कि इस समय अवैध खनन नहीं हो रहा है, जिस कारण इसमें लिप्त लोगों के बारे में जानकारी नहीं मिली है। पट्टी पटवारी और अन्य राजस्व कर्मियों की टीम गठित की गई है, जो मौके पर नजर रखे हुए हैं। उन्होंने कहा कि जैसे ही अवैध खनन करने वालों की जानकारी होगी उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
पद से इस्तीफा दे विधायक, प्रमुख
भीमताल। सिमायल रैक्वाल गांव में अवैध खनन को लेकर विधायक दान सिंह भंडारी और ब्लाक प्रमुख लाखन सिंह नेगी के बयानों को कांग्रेसी नेताओं ने हास्यास्पद बताया है। उनका कहना है कि दोनों भाजपा नेता अवैध खनन के लिए प्रशासन को जिम्मेदार ठहराकर अपनी जिम्मेदारी से बच रहे हैं। जिला कोआपरेटिव बैंक निदेशक मंडल सदस्य संजय वर्मा एवं कांग्रेस के जिला सचिव प्रदीप ढैला का कहना है कि विधायक और प्रमुख यह कहकर पल्ला नहीं झाड़ सकते हैं कि उन्होंने प्रशासन से इसकी शिकायत की और प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की। विधायक और ब्लाक प्रमुख को खुद ही अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए।
