
नई दिल्ली। एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की सचिव नैनी जयशीलन ने कहा कि रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) ही एनसीआर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट का सोल्यूशन बनेगा। यह मेट्रो नेटवर्क निर्माण के मुकाबले कम खर्च पर तैयार होने के अलावा 160 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से एनसीआर को जोड़ेगा।
दिल्ली सरकार के कार्यक्रम आईं नैनी जयशीलन ने कहा कि कॉरिडोर निर्माण का ठेका देने की प्रक्रिया एक साल में पूरी होगी और फिर छह साल निर्माण में लगेंगे। वर्ष 2020 से पहले एनसीआर में हाईस्पीड ट्रेन नहीं दौड़ेगी। हालांकि, इस पर मेट्रो रेल (152-341 करोड़) के मुकाबले प्रति किमी 130-182 करोड़ रुपये खर्च आएगा। पहले चरण में तीन आरआरटीएस कॉरिडोर निर्माण के लिए कंपनी गठन को मंजूरी मिल चुकी है। एनसीआर में शामिल चार राज्यों ने एमओयू भी साइन कर लिया है। कश्मीरी गेट और सराय काले खां तक आरआरटीएस को लाने के मामले में दिल्ली सरकार की आपत्ति पर उन्होंने कहा है कि यह फैसला दिल्ली सरकार को करना है। पब्लिक को तो कनेक्टिविटी चाहिए।
यात्रियों को नहीं होगी दिक्कत
बोर्ड की सचिव का कहना है कि एनसीआर में जो भी स्टेशन आरआरटीएस में बनेंगे, वे मेट्रो रेल से इंटीग्रेटेड होंगे। दो कॉरिडोर कश्मीरी गेट और एक सराय काले खां में समाप्त होगा। किसी यात्री को एक कॉरिडोर से दूसरे में जाने के लिए कोई दिक्कत नहीं होगी। अलवर और पानीपत से आने वाला कॉरिडोर कश्मीरी गेट पर मिलेगा, जबकि अलवर और मेरठ कॉरिडोर में इंटरचेंज करने का मौका सराय काले खां स्टेशन पर मिलेगा। वहीं, इस मामले में दिल्ली सरकार के अधिकारियों का कहना है कि बॉर्डर पर रोकने या शहर के अंदर आने देने को लेकर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। सरकार ने केंद्र सरकार और एनसीआर प्लानिंग बोर्ड से अंतिम जवाब के लिए 15 अगस्त तक का समय मांगा है। मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने आपत्ति जताई है तो अंतिम फैसला भी वहीं से होगा।
