
पौड़ी। गढ़वाल मंडल में 191 सड़कें अभी भी बंद पड़ी हैं। दैवी आपदा की चपेट में आई 1289 सड़कों में से 1098 पर ही यातायात बहाल हो सका है। इन हालातों में चार सौ से अधिक गांव अलग-थलग पड़े हुए हैं। सर्वाधिक 48 सड़कें चमोली जिले में बंद है। पौड़ी में 40, उत्तरकाशी और रुद्रप्रयाग में 21-21, टिहरी 43, देहरादून 14, और हरिद्वार में 4 सड़कें बंद है। इसके अलावा 66 पुल आवाजाही के लिए बंद है। इनमें उत्तरकाशी में 11, चमोली 18, रुद्रप्रयाग में 30, टिहरी, देहरादून में तीन-तीन और पौड़ी में एक पुल बंद है।
लोनिवि के अनुसार उत्तरकाशी जिले की उत्तरकाशी-घनसाली-तिलवाड़ा, भैला-टिपरी-सौरा, चमोली में गोविंदघाट-गुरूद्वारा पहुंच मार्ग, रुद्रप्रयाग में गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल सड़क, पौड़ी जिले में पैठाणी-चुठाणी आदि सड़कें ऐसी हैं, जिनका काफी हिस्सा पूरी तरह मिटा हुआ है। ऐसी जगहों पर इन्हें जोड़ने के लिए नई सड़क बनाने की जरूरत पड़ रही है। नई सड़क के निर्माण को नई जगह लेनी पड़ेगी, सड़क का रिएलाइमेंट करना होगा। लोनिवि के मुख्य अभियंता आरपी भट्ट बताते हैं कि क्षतिग्रस्त सड़कों में कई स्लाइड जोन बन चुके हैं। इन्हें जोड़ने से जिन जगहों से नयी सड़कें बने उनमें नया स्लाइड जोन न बने, इसके लिए सड़क निर्माण से पहले भूगर्भ विशेषज्ञों की राय लेनी पड़ेगी।
इनका कहना है
‘‘मंडल में आपदा से कई सड़कों में काफी हिस्सा पूरी तरह नेस्तनाबूद हुआ है। मिट चुके हिस्से में सड़क निर्माण कर पाना संभव नहीं है। ऐसे में इन्हें जोड़ने से दूसरी जगहों से सड़क बनानी पड़ेगी। इन सड़कों का नई जगह से रिएलाइमेंट करना होगा ’’।
-आरपी भट्ट मुख्य अभियंता लोनिवि गढ़वाल मंडल पौड़ी
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जोखिमभरा है हाईवे का सफर
रुद्रप्रयाग। जिले में केदारनाथ हाईवे और लिंक मार्गों के बंद होने से ग्रामीणों को लंबा पैदल सफर तय करना पड़ रहा है। राहत कार्य भी प्रभावित हैं। बीआरओ ने हालांकि केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग को गबनी गांव तक आंशिक रुप से खोल दिया गया है, लेकिन इस मार्ग पर वाहनाें की आवाजाही खतरनाक बनी हुई है। जिले की बंद प्रमुख सड़कों में केदारनाथ हाईवे, बांसवाड़ा-मोहनखाल सड़क, कुंड-गोपेश्वर, कांडई-कमोल्डी, विजयनगर-तैला, अगस्त्यमुनि-गणेशनगर और भीरी-परकंडी आदि शामिल है।
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अलग-थलग पड़े हैं सौ से अधिक गांव
उत्तरकाशी। जिले में यमुनोत्री और गंगोत्री राजमार्ग ही नहीं दर्जनों लिंक मार्ग आपदा के बाद से बंद पड़े हैं। कुल 163 सड़कें अवरुद्ध हुई थी। इनमें अभी तक 142 पर ही किसी तरह कामचलाऊ यातायात बहाल हो सका है। 21 सड़कों के बंद होने से सौ से अधिक गांव अलग-थलग पड़े हैं। इस वजह से यहां जरूरी वस्तुओं की सप्लाई भी ठप हो गई है।
मंगलवार की रात हुई मूसलाधार बारिश में वरूणावत शीर्ष को जोड़ने वाली महिडांडा सड़क भूस्खलन से अवरुद्ध हो गई जिससे संग्राली गांव के साथ ही आईटीबीपी का सीआईजेडब्ल्यू स्कूल का संपर्क भी कट गया। आईटीबीपी कैंपस में रहने वाले अधिकारी और जवानों के बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। दो दिनों से सड़क अवरुद्ध होने से आ रही दिक्कतों को देखते हुए आईटीबीपी के जवान भी सड़क खोलने के प्रयास में जुटे हैं।
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जरूरी वस्तुओं का हुआ संकट
कर्णप्रयाग। सड़कों के डेढ़ माह में भी नहीं खुलने से अब दर्जनों गांवों में जरूरी वस्तुओं का संकट पैदा हो गया है। ऋषिकेश-बदरीनाथ राजमार्ग आपदा के बाद से जब-तब बंद हो रहा है। कर्णप्रयाग-ग्वालदम मोटर मार्ग 47 दिन बाद भी सुधर नहीं पाया है। नारायणबगड़ से थराली के बीच 40 से अधिक ग्राम पंचायतें अलग-थलग पड़ी हैं।
पिंडरघाटी में थराली-देवाल मार्ग भी बंद पड़ा है। मुख्य बाजार से राड़ीबगड़ तक 11 सौ मीटर मार्ग ध्वस्त हो गया है। देवाल क्षेत्र में भी सड़कें बंद होने से कई गांवों का ब्लाक मुख्यालय से पिछले 20-25 दिन से संपर्क कटा हुआ है। सोलपट्टी के 18 गांवों को जोड़ने वाला थराली-डुंग्री मार्ग आपदा के बाद से बंद पड़ा है। गौचर, कर्णप्रयाग, सिमली, नारायणबगड़, आदिबदरी, गैरसैंण, थराली में लोगों की आवाजाही कम हो चुकी है।
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हफ्ते भर से नहीं खुला नैनीताल हाईवे
कर्णप्रयाग। नैनीताल राजमार्ग सातवें दिन भी नहीं खुल सका है। मलबे के सामने एनएच की टीम एसहाय नजर आ रही है। गढ़वाल को कुमाऊं से जोड़ने वाला कर्णप्रयाग-नैनीताल हाईवे जखेड़ गदेरे में एक सप्ताह से बंद है, लेकिन एनएच खंड रानीखेत यहां यातायात बहाल नहीं कर पाया है। मार्ग पर दल-दल और करीब 50 मीटर ऊपर से हो रहे भू-धंसाव के चलते पैदल आवागमन भी जोखिम भरा हो रखा है।
हल्द्वानी से पानी की निकासी के लिए पाइप मंगाए गए हैं, जिसके बाद अस्थायी ट्रीटमेंट करने के प्रयास किए जाएंगे। बरसात खत्म होने पर क्षतिग्रस्त सड़क का स्थायी ट्रीटमेंट किया जाएगा।
-पीएस मार्तोलिया, अधीक्षण अभियंता एनएच खंड रानीखेत।
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कई सड़कों के लिए करना होगा लंबा इंतजार
गोपेश्वर। जनपद में पोखरी, घाट, जोशीमठ और थराली क्षेत्रों के गांवों को जोड़ने वाले लिंक मोटर मार्ग भूस्खलन के चलते अवरुद्ध पड़े हैं। घाट-नंदप्रयाग, नंदप्रयाग-पोखरी, गोपेश्वर-पोखरी और गोपेश्वर-मंडल-ऊखीमठ मार्ग जुलाई से ही बंद पडे़ हैं। वहीं गोपेश्वर-ऊखीमठ मोटर मार्ग 70 किमी तक भूस्खलन से अवरुद्ध हो रखा है। गोपेश्वर-पोखरी मोटर मार्ग करीब एक किमी तक भूस्खलन की चपेट में आ गया है, जिससे दो माह तक भी सड़क खुलने की उम्मीद नहीं है। पोखरी, घाट, मंडल, थराली क्षेत्रों के ग्रामीण मीलों पैदल नाप रहे हैं। इधर, लोनिवि के अधीक्षण अभियंता मदन सिंह ह्यांकी का कहना है कि उनके हमारे पास कुल 22 जेसीबी हैं, जो काम पर लगी हैं। 36 मार्ग खोल दिए हैं। अधिक गांवों को जोड़ने वाली सड़कों को प्राथमिकता से खोला जा रहा है।
