पूजा के नेत्र दान से मिल रही प्रेरणा

पिथौरागढ़। 15 वर्ष में जयकोट की पूजा आपदा की चपेट में आकर भगवान को प्यारी हो गई। लेकिन नन्हीं उम्र में उसने नेत्र दान कर लोगों को प्रेरणा दी है। आंखों के दान दिए जाने की जानकारी के बाद लोगों में नेत्र दान को लेकर उत्सुकता है। पर नेत्र दान करने के लिए जरूरी संसाधन नहीं होने से वे मायूस भी हैं।
धारचूला के जयकोट गांव की निवासी पूजा (15) पुत्री फल सिंह सात अगस्त को चल गांव में खाई में गिर कर घायल हो गई थी। 23 जुलाई को दिल्ली में उसका निधन हो गया था। अस्पताल में उसने नेत्र दान की इच्छा की। धारचूला से लेकर पिथौरागढ़ तक उसकी इस बहादुरी को खूब सराहा गया।
शिक्षाविद डा.पीतांबर अवस्थी, कवि ललित शौर्य, प्रकाश जोशी सहित तमाम लोगों ने उसके इस कार्य की खूब प्रशंसा की। कहा कि नन्हीं बच्ची की यह पहल जाते-जाते भी प्रेरणा दे गई। लेकिन नेत्र दान की व्यवस्था नहीं होने से दूरदराज के लोग चाह कर भी नेत्र दान नहीं करा पाते हैं। पंकज गर्ब्याल, गोपाल सिंह दुग्ताल, राधिका दुग्ताल आदि का कहना है कि पूजा द्वारा किया गया नेत्र दान इलाके में लोगों को बड़ा संदेश दे गया है।
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय में हिंदी के सलाहकार डा.तारा सिंह नेत्र दान के लिए अभियान छेड़े हुए हैं। इसके लिए वे स्कूलों से लेकर सार्वजनिक कार्यक्रमों में नागरिकों से संकल्प पत्र भरवाते हैं। वे इस मुहिम से दर्जनों लोगों को जोड़ चुके हैं। उधर नेत्र रोग विशेषज्ञ डा.जीबी बिष्ट का कहना है कि मृत्यु के छह घंटे के भीतर आंख को निकालकर प्रिजर्व करना जरूरी है। इसके बाद निकाली गई आंख का प्रत्यारोपण 14 दिन के भीतर किया जाना होता है।

Related posts