1905 वाला झटका आया तो कुछ नहीं बचेगा

शिमला। हिमाचल में 1905 में आए कांगड़ा भूकंप जैसा झटका दोबारा लगे, तो करीब 3.50 लाख लोगों की जान जा सकती है। यदि दिन के समय यह भूकंप आया तो भी करीब एक लाख लोगों की मौत हो सकती है। यह आकलन भारत सरकार के नेशनल सिस्मिक एडवाइजर रहे प्रो. एएस आर्य की स्टडी रिपोर्ट का है। इसके बाद राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन की पहल पर आईआईटी बांबे और मद्रास ने भी संयुक्त रूप से सर्वे रिपोर्ट तैयार की है।
इस रिपोर्ट के अनुसार सिस्मिक जोन फाइव के सुंदरनगर को भूकंप का केंद्र मानते हुए इसके प्रभाव का आकलन किया गया है। केंद्र का चयन सौ फीसदी काल्पनिक नहीं है। वैज्ञानिकों का मानना है कि 400 से 500 साल पहले सुंदरनगर में भी बड़ा भूकंप आया था। इसी आधार पर दोबारा यहां भूगर्भीय हलचल हो सकती है। यदि ऐसा हुआ तो हिमाचल ही नहीं, बल्कि हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड भी इससे प्रभावित होंगे। रिपोर्ट कहती है कि करीब 11 फीसदी आबादी चोटिल होगी और सिर्फ फौरी राहत राशि बांटने पर ही हिमाचल जैसे राज्य को 700 से 800 करोड़ रुपये बांटने होंगे। इसी रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि हिमालय के इतिहास के अनुसार 1850 से पहले हर 50 साल में यहां 3 से 4 बड़े भूकंप आते थे, जिनकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 7 से अधिक होती थी। लेकिन पिछले करीब 60-70 वर्षों में हल्की हलचल तो हो रही है, लेकिन बड़ा भूकंप नहीं आया। इसलिए भी यह आशंका ज्यादा प्रबल है कि बड़ा भूकंप आ सकता है।
आपदा प्रबंधन देख रहे विशेष सचिव राजस्व डा. अमनदीप गर्ग कहते हैं कि इस रिपोर्ट के आधार पर तीनों राज्यों की संयुक्त मॉक ड्रिल हुई थी। इसमें जो खामियां सामने आई थी, उन्हें दूर किया जा रहा है।
इनसेट
डीसी का परिवार भी नहीं बचा था धर्मशाला में
शिमला। 4 अप्रैल 1905 की सुबह 6 बजकर 19 मिनट पर कांगड़ा में भूकंप आया। कांगड़ा डिस्ट्रिक्ट गैजेटियर के रिकार्ड के अनुसार नड्डी इसका केंद्र था और तीव्रता करीब 8 थी। अंग्रेज अफसर बीटी गिब्सन तक डीसी थे और दौरे पर काजा गए थे। घर में पत्नी और बिटिया हादसे में जान गंवा बैठी। एसपी कांगड़ा नूरपुर में थे। सड़कें टूटने के कारण वह घोड़े पर धर्मशाला दूसरे दिन वापस पहुंचे। तब करीब 35 हजार लोगों की जान इस हादसे में गई थी। कहते हैं हर 100 साल बाद ऐसा भूकंप आने की आशंका रहती है, क्योंकि भूगर्भीय प्लेट्स जगह बदलती हैं।
इनसेट
भूकंप से भी जानलेवा है लापरवाही : विशेषज्ञ
शिमला। हिमाचल में आपदा प्रबंधन प्रोजेक्ट के निदेशक रहे डीसी राणा भूकंप से निपटने की ट्रेनिंग के लिए जापान गए थे। दो महीने वह जापान में रहे। वह कहते हैं कि जापान में लगभग हर रोज धरती हिलती है। उनकी ट्रेनिंग के दौरान एक दिन 6.5 तीव्रता का बड़ा भूकंप भी उन्होंने देखा, लेकिन दीवारों पर दरार तक नहीं आई। क्योंकि जापान में इसके लिए तैयारी हर स्तर पर है। दूसरी ओर हमारे देश में हालत इतनी अच्छी नहीं है। उन्होंने कहा कि जोन 5 वाले क्षेत्रों में धरती का हिलना असामान्य प्रक्रिया नहीं है, लेकिन हम इससे निपटने की तैयारी की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।

Related posts